दिल्ली में 24 मई को होगा जनजाति सांस्कृतिक समागम

दिल्ली में 24 मई को होगा जनजाति सांस्कृतिक समागम

नई दिल्ली, 21 मई। जनजाति सुरक्षा मंच और जनजाति जागृति समिति मिलकर 24 मई को दिल्ली में ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ का आयोजन करेंगे। इसमें देशभर से विभिन्न जनजातीय समुदाय के सदस्य भाग लेंगे और जागरूकता बढ़ाने के लिए आएंगे।

नरेंद्र भाटिया ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि इस कार्यक्रम में लोग अपने खर्चे पर शामिल होंगे। किसी भी संस्था की ओर से वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है। हमारा मकसद यह दिखाना है कि भारत की हर जनजाति अपनी सांस्कृतिक धरोहर को साझा करने के लिए यहाँ एकत्रित हो रही है। इस शोभायात्रा में दिल्ली में इनकी अनूठी संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन देखने को मिलेगा। दिल्ली में निवास कर रहे कई जनजातीय समुदाय भी उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग ले रहे हैं और इसे सफल बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।

भाटिया ने कहा कि इससे हमारे जनजातीय भाई-बहनों, विशेषकर नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, सभ्यता, लोक नृत्य, गीत, पूजा-पद्धति और धार्मिक मान्यताओं के बारे में सीखने का अवसर मिलेगा। इससे लोग जागरूक होंगे ताकि दूर-दराज के इलाकों से पलायन की प्रक्रिया को रोका जा सके। युवा पीढ़ी अपने इतिहास और समृद्ध विरासत के बारे में जान सके, यही हमारा मुख्य उद्देश्य है।

उन्होंने यह भी बताया कि जनजातीय समुदाय में जागरूकता फैलाने के प्रयास होंगे। कुछ ऐसी जनजातियां भी हैं, जो पहली बार ट्रेन से यात्रा करेंगी। जब वे दिल्ली की यात्रा करेंगे, जो एक ऐतिहासिक शहर है, तो वे अपनी और दिल्ली की दुनिया में अंतर देख सकेंगे। इससे उन्हें विविधता में एकता का अनुभव मिलेगा। अगर हम बारीकी से देखें तो हर जनजाति की अपनी खासियत होती है।

भाटिया ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से लोग एक-दूसरे की खासियतों को जानने और समझने का अनुभव करेंगे। जब वे अपने-अपने घर लौटेंगे, तो एक संकल्प के साथ लौटेंगे कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करेंगे और अपनी आगामी पीढ़ी को इसी दिशा में अग्रसर करेंगे। उन्हें छोटे-छोटे प्रलोभनों में न पड़ने और पलायन से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

उन्होंने आशा जताई कि यह कार्यक्रम सफल रहेगा। इसमें विभिन्न क्षेत्र की मशहूर हस्तियां शामिल होंगी, खासकर शिक्षा, साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति। उनके विचारों और अनुभवों को सुनकर लोग प्रेरित होंगे और एक संकल्प के साथ वापस लौटेंगे। इससे जनजातीय समुदाय को नई दिशा और मार्गदर्शन मिलेगा।