दिल्ली की 96,000 स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट एलईडी में बदलने की मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण योजना

दिल्ली की 96,000 स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट एलईडी में बदलने की मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण योजना

नई दिल्ली, 20 मई। राजधानी की रोशनी में बड़ा परिवर्तन होने वाला है। दिल्ली सरकार ने लगभग 96,000 स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट एलईडी सिस्टम से प्रतिस्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में लिया गया। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा इस परियोजना का चरणबद्ध कार्यान्वयन किया जाएगा, जिसकी लागत लगभग 473.24 करोड़ रुपये है। सरकार का लक्ष्य है कि इस बदलाव को दिवाली से पहले पूरा कर लिया जाए, जिससे प्रमुख सड़कों पर नई स्मार्ट रोशनी स्थापित हो सके।

बैठक में पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। यह परियोजना मुख्यमंत्री द्वारा 2026-27 के बजट में की गई घोषणाओं का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को ऊर्जा-कुशल स्मार्ट एलईडी में बदलने का प्रस्ताव रखा गया था। वर्तमान में, पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर लगभग 45,000 पुरानी हाई प्रेशर सोडियम वेपर (एचपीएसवी) लाइटें और लगभग 51,000 एचपीएसवी एलईडी लाइटें मौजूद हैं। कुल मिलाकर, नेटवर्क में 96,000 लाइटें और 51,160 खंभे शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्तमान प्रणाली में कई समस्याएं थीं। रियल-टाइम मॉनिटरिंग की कमी के कारण खराब स्ट्रीट लाइटों की पहचान अक्सर शिकायतों के बाद ही हो पाती थी। कई क्षेत्रों में अंधेरे स्थानों की मरम्मत लंबे समय तक नहीं की जाती थी, जिससे सड़क की दृश्यता और सार्वजनिक सुरक्षा, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा, प्रभावित होती थी। मौजूदा प्रणाली में असमान प्रकाश गुणवत्ता और उच्च बिजली खपत जैसी समस्याएं भी थीं। उन्होंने कहा कि नई स्मार्ट एलईडी प्रणाली इन सभी मुद्दों का समाधान करेगी। इस परियोजना के अंतर्गत सभी एचपीएसवी लाइटों और पुराने उपकरणों को स्मार्ट एलईडी में बदला जाएगा, साथ ही 5,000 अतिरिक्त खंभों की आवश्यकता भी पूरी की जाएगी।

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एक केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (सीसीसी) होगा, जो प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की निगरानी रीयल-टाइम में करेगा। खराबी की तुरंत पहचान की जा सकेगी और लाइटों को दूर से नियंत्रित किया जा सकेगा। यह प्रणाली प्रकाश की तीव्रता को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने की क्षमता भी प्रदान करेगी, जिससे ऊर्जा दक्षता और संचालन प्रबंधन में सुधार होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस परियोजना से दीर्घकालिक रूप से वित्तीय बचत भी होगी। स्मार्ट एलईडी प्रणाली के कार्यान्वयन के बाद, सरकार को लगभग 25 करोड़ रुपये की वार्षिक बिजली बचत की उम्मीद है। पांच वर्षों में, ऊर्जा खर्च में काफी कमी आ सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से दिल्ली की सड़कों पर अंधेरे स्थल समाप्त होंगे, महिलाओं की सुरक्षा में सुधार होगा और सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से राजधानी को एक आधुनिक, सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था मिलेगी। दिवाली से पहले इस परियोजना को पूरा करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य त्योहारों के समय पूरे शहर को जगमगाते रखना है। बैठक के दौरान, सार्वजनिक परिवहन विभाग के मंत्री परवेश साहिब सिंह ने इस परियोजना का एक विशेष नाम रखने का सुझाव दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताई।