दिल्ली जनजातीय सम्मेलन: संस्कृति का गर्व व्यक्त करते हैं प्रतिभागी

दिल्ली जनजातीय सम्मेलन: संस्कृति का गर्व व्यक्त करते हैं प्रतिभागी

नई दिल्ली, 24 मई। दिल्ली में आयोजित 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' में विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय समुदायों के सदस्यों ने अपनी सांस्कृतिक, परंपरागत और पहचान को लेकर गर्व का प्रदर्शन किया। लाल किला क्षेत्र में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने कहा कि हर किसी को अपनी संस्कृति को गर्व से प्रदर्शित करना चाहिए। इस आयोजन का उद्देश्य 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाना था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस भव्य सांस्कृतिक समारोह में देशभर के 550 से अधिक जनजातीय समुदायों के लगभग 1.5 लाख प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद जताई गई।

कार्यक्रम में उत्तराखंड से आई एक महिला ने बताया कि उनके 40 वर्षों के जीवन में यह पहला अवसर है जब उन्होंने इतना बड़ा जनजातीय कार्यक्रम देखा। पारंपरिक पोशाक में सजी इस महिला ने कहा कि, “हर किसी को अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करने और गर्व करने का अधिकार प्राप्त होना चाहिए।”

एक अन्य जनजातीय महिला ने इस आयोजन में भाग लेकर अपनी खुशी व्यक्त की और कहा, "हम यहाँ आकर बहुत प्रसन्न हैं। हम लाल किला भी देखने की योजना बना रहे हैं।"

महिला प्रतिभागी ने यह भी साझा किया कि यहां उपस्थित लोग केवल कार्यक्रम का आनंद लेने के लिए नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय के समर्थन और उनकी समस्याओं को उजागर करने के लिए भी आए हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोग जनजातीय अधिकारों और संरक्षण के लिए एकजुटता से अपनी आवाज उठा रहे हैं।

कार्यक्रम में एक अन्य प्रतिभागी ने बताया कि इस समारोह का मुख्य उद्देश्य विभिन्न जनजातीय समुदायों को एक मंच पर लाना है। उन्होंने कहा, "हम विभिन्न राज्यों और भाषाओं के लोगों से मिल रहे हैं। यहाँ आकर बहुत अच्छा लग रहा है और व्यवस्थाएं भी बेहद उत्कृष्ट हैं।"

एक प्रतिभागी ने कहा कि भारत में लगभग 750 जनजातीय समुदाय हैं, जिनमें से 550 से अधिक समुदाय इस समारोह में शामिल हुए हैं। उन्होंने इसे 'मिनी इंडिया' की उपमा दी।

उन्होंने बताया कि यहाँ विभिन्न जनजातीय समाजों की सांस्कृतिक धरोहर, परंपराएँ, वेशभूषा, बोलियाँ, वाद्य यंत्र और जीवनशैली प्रदर्शित की जा रही हैं। उनका मानना है कि पूरे देश को देखना चाहिए कि जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति और परंपराओं को किस प्रकार संरक्षित कर रहा है।

इस बीच, कार्यक्रम में मौजूद भाजपा नेताओं ने इसे 'एकजुट भारत' की संस्कृति और जनजातीय एकता का बड़ा उत्सव करार दिया।