नई दिल्ली, 20 मई। भारत में केवल घरेलू उपयोग के लिए निर्मित जीवनरक्षक एंटी कैंसर दवाओं के अवैध निर्यात के मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
याचिका दायर करने वाले ने अदालत को बताया कि कुछ कंपनियां इन दवाओं को घरेलू बाजार से खरीदती हैं और वेरिफिकेशन सिस्टम में खामियों का लाभ उठाते हुए इन्हें वैध निर्यात के साथ मिलाकर विदेश भेज देती हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सीडीएससीओ, डीजीएफटी, सीबीआईसी, डीआरआई और डीजीजीआई को नोटिस भेजकर चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि ये दवाएं मुख्य रूप से भारतीय मरीजों, विशेष रूप से कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए उपलब्ध थीं, किंतु कुछ कंपनियां और निर्यातक इन्हें विदेश भेज रहे हैं। इससे देश में इन आवश्यक दवाओं की कमी हो रही है, जिससे गंभीर रोगों से ग्रसित मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और इस तरह की अवैध सप्लाई पर काबू पाने के लिए क्या निगरानी तंत्र तैयार किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस अवैध व्यापार से न केवल मरीजों की जान को खतरा है, बल्कि यह देश की दवा वितरण व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित विभागों से कठोरता के साथ पूछा कि निर्यात के नाम पर घरेलू जरूरत की दवाओं को विदेश भेजने की इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए वे क्या प्रभावी कदम उठा रहे हैं।