नई दिल्ली, 22 मई। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी तसलीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी को छह महीने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की है। साथ ही, कोर्ट ने यूएपीए से संबंधित जमानत के महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर विचार करने के लिए मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा है।
बड़ी बेंच यह निर्णय करेगी कि यूएपीए कानून के तहत जमानत के लिए क्या मापदंडों का पालन किया जाएगा। क्या यूएपीए की सख्त शर्तों के बावजूद ट्रायल में देरी के कारण जमानत दी जा सकती है या नहीं? जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने जनवरी में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से मना कर दिया था।
हाल ही में, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस निर्णय पर सवाल उठाए। बेंच ने कहा कि उमर और शरजील को जमानत न देने का निर्णय 2021 में तीन जजों की बेंच द्वारा दिए गए आदेश का पालन नहीं करता।
तसलीम अहमद को 24 जून 2020 को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी गिरफ्तारी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ 23 से 25 फरवरी 2020 के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित थी।
उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), शस्त्र अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम और यूएपीए की धाराओं 13, 16, 17 और 18 के तहत आरोप लगे हैं।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि वह जाफराबाद, मौजपुर, चांद बाग और गोकुलपुरी जैसे क्षेत्रों में दंगे भड़काने और एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे।
अहमद का कहना है कि उन्होंने केवल सीएए का विरोध किया था और उन्हें आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
उनके अलावा, इस कथित साजिश में उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान, शादाब अहमद, अथर खान और अब्दुल खालिद सैफी अन्य आरोपी शामिल हैं।