मुंबई, 21 मई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुद को भगवान का दूत बताने वाले अशोक कुमार एकनाथ खरात, जिसे 'कैप्टन' के नाम से जाना जाता है, को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 19 मई को गिरफ्तार किया। आरोपी को मुंबई की पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 26 मई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
ईडी की कार्रवाई नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और ‘महाराष्ट्र मानव बलि तथा अन्य अमानवीय, दुष्ट और अघोरी प्रथाओं एवं काला जादू रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम’ की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। बाद में इस जांच में शिरडी और राहाता पुलिस स्टेशन में दर्ज मामलों को भी शामिल किया गया।
जांच में यह पता चला कि अशोक कुमार खरात, जिसे 'कैप्टन' कहा जाता है, धार्मिक गतिविधियों के बहाने एक संगठित वसूली रैकेट चला रहा था। उसने अपने आपको भगवान शिव का अवतार बताकर अलौकिक शक्तियों का दावा किया और दिव्य ज्ञान की बात कही।
जांच एजेंसी के अनुसार, वह लोगों में मृत्यु, काला जादू और अनिष्ट का भय उत्पन्न कर उन्हें भावनात्मक रूप से नियंत्रित करता था। आरोपी कथित तौर पर झूठे अनुष्ठानों और फर्जी धार्मिक उपायों के नाम पर लोगों से बड़ी तादाद में धन व संपत्ति एकत्र करता था।
जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई, जिसमें एक शिकायतकर्ता से लगभग 5.62 करोड़ रुपए वसूले गए। ईडी का कहना है कि यह राशि आरोपी के निर्देश पर एक महंगी मर्सिडीज कार, विदेश यात्रा, अमेरिका में चिकित्सा उपचार और फार्महाउस के विकास पर खर्च करने के लिए ली गई थी। एजेंसी का आरोप है कि आरोपी ने इस तरीके से कई लोगों को प्रभावित कर करोड़ों की अवैध कमाई की।
पीएमएलए के तहत विस्तारित जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने कथित वसूली और धोखाधड़ी से मिली ‘अपराध की आय’ को कई बैंक खातों, सहकारी ऋण समितियों और विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर खोले गए प्रॉक्सी खातों के माध्यम से छिपाया।
ईडी के अनुसार, आरोपी ने दो सहकारी क्रेडिट सोसाइटियों के जरिए कई बेनामी खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट खोल रखे थे, जहां बड़ी राशि जमा की जाती थी, जिसे बाद में नकद के रूप में स्थानांतरित किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने मोबाइल नंबर और नॉमिनी विवरण के माध्यम से इन खातों का प्रबंधन करता था तथा अपराध से अर्जित धन को संपत्ति खरीदने में उपयोग करता था।
ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत 13 और 14 अप्रैल, 17 अप्रैल, 23 अप्रैल, 5 मई और 18 मई को आरोपी और उसके सहयोगियों के विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक स्थानों, बैंक लॉकर और वाहनों पर कई छापेमारी की।
इन छापेमारी के दौरान 13.92 करोड़ रुपए नकद, 5,500 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा (लगभग 5.11 लाख रुपये) और लगभग 1.12 करोड़ रुपए के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए गए। इसके साथ ही 2.25 करोड़ रुपए की बैंक जमा राशि को फ्रीज किया गया और एक महंगी मर्सिडीज कार भी जब्त की गई।
तलाशी अभियानों के दौरान ईडी ने कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी हासिल किए हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त किया गया। एजेंसी का कहना है कि मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों के संबंध में अनुसंधान जारी है।