देश के बंटवारे में संघ की सीमित ताकत रही: सुनील आंबेकर

देश के बंटवारे में संघ की सीमित ताकत रही: सुनील आंबेकर

नई दिल्ली, 22 मई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि 1942 से 1947 के बीच दिल्ली और सम्पूर्ण पंजाब में संघ का विस्तार तेजी से हुआ। बहुत से लोग संघ से जुड़े और उसे मजबूत किया, लेकिन विभाजन के समय संघ का प्रभाव पर्याप्त नहीं था; अन्यथा देश का बंटवारा होता ही नहीं। वे शुक्रवार को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित डाक्यूमेंट्री 'दिल्ली में संघ यात्रा' की screening के दौरान यह बात कह रहे थे।

आंबेकर ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाया गया है कि उस समय गुरुजी ने निर्देश दिया था कि विभाजन के बाद पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए और स्वयंसेवक तब तक डटे रहें जब तक अंतिम व्यक्ति सुरक्षित नहीं आ जाता।

सुनील आंबेकर ने कहा कि इस काम में अनेक स्वयंसेवकों ने बलिदान दिया, और कितनों को कष्ट सहना पड़ा, इसकी कोई संख्या नहीं है। विस्थापितों के लिए कई कैंप लगाए गए, जहां लाखों लोग रहे। अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में जब सभी लोग व्यस्त थे, गुरुजी कराची में थे और वहां के स्वयंसेवकों को हिंदू समाज की सुरक्षा के लिए मार्गदर्शन कर रहे थे।

आंबेकर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि संघ की स्थापना करने वाले डॉक्टर हेडगेवार को राजनीति में उतरना होता, तो वे एक नया राजनीतिक दल बना सकते थे। लेकिन उनका उद्देश्य था समाज को जागरूक करना और उसे मजबूत बनाना, इसलिए उन्होंने संघ की स्थापना की। उनका लक्ष्य था समाज सेवा, उत्थान और पूरे राष्ट्र को आत्मनिर्भरता से खड़ा करना।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में संघ कार्य की शुरुआत संघ के प्रारंभिक काल में ही हुई थी। आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार के समय में ही दिल्ली में संघ कार्य आरंभ हुआ, इसलिए दिल्ली का संघ कार्य संघ के 100 साल के इतिहास से गहराई से संबंधित है।

इतने वर्षों में देश में जो भी घटनाएं हुईं, उनमें दिल्ली का एक विशेष स्थान रहा है, और यहां के संघ कार्य का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वतंत्रता के बाद भी दिल्ली राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। इस स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शाखाओं के माध्यम से एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन के रूप में कार्य किया, जो समाज के समग्र उत्थान के लिए प्रयासरत है।

इस अवसर पर संघ के दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ अनिल अग्रवाल ने संघ कार्य की निरंतरता और अनुकूलनशीलता पर प्रकाश डाला।

दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख रीतेश अग्रवाल ने कहा कि इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत डॉक्यूमेंट्री संघ के बीजारोपण से लेकर उसके विस्तार की कहानी को ऐतिहासिक साक्ष्यों और स्मृतियों द्वारा दर्शाती है। इसमें दिल्ली में संघ की शुरुआत, विभाजन का दर्द और उसके दौरान किए गए संघ कार्य का चित्रण किया गया है।

उन्होंने बताया कि यह फिल्म दिल्ली की पहली शाखा से शुरू होकर आज के दिल्ली में संघ के विस्तृत कार्यों तक की यात्रा को दिखाती है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष पर विशेषांक 'राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष' का भी उल्लेख किया।

रीतेश अग्रवाल ने कहा कि इस विशेषांक और डॉक्यूमेंट्री के लिए दिल्ली के 60 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार लिए गए, 85 से ज्यादा पुस्तकों का अध्ययन किया गया, और विभिन्न अभिलेखागार से सामग्री एकत्र की गई। इसके लिए 100 घंटे से अधिक की वीडियो फुटेज का उपयोग किया गया। इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अभिलेखागार से पुराने वीडियो और साक्षात्कार का भी अध्ययन किया गया।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यालय सचिव अशोक पोरवाल, दिल्ली प्रांत प्रचारक विशाल, सह कार्यवाह राजेश, एवं अन्य महत्वपूर्ण सदस्य उपस्थित थे।