मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 (Form 6) में किए गए बदलावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। फॉर्म-6 में किए गए बदलाव के बाद नए मतदाताओं को अब यह जानकारी देनी होगी कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। इस बदलाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बिना किसी निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए ऑनलाइन फॉर्म में संशोधन किए गए हैं, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर नए मतदाताओं के पंजीकरण पर पड़ेगा। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़े सभी निर्णय पूरी आयोगीय व्यवस्था और सामूहिक सहमति के बाद ही लिए गए हैं।

पहली बार वोट देने वालों पर क्यों पड़ा असर?

Form 6 उन नागरिकों के लिए है, जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं। नए बदलाव के बाद ऑनलाइन आवेदन में SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा दिखाई देने लगा। इसमें आवेदक को यह बताना था कि उसका नाम पिछली SIR सूची में था, उसके परिवार के किसी सदस्य का नाम था या नहीं। यह जानकारी अलग से जरुरी नहीं थी, लेकिन इसको भरे बिना फॉर्म जमा नहीं हो रहा था। कुछ मामलों में आवेदक को पिछली SIR सूची में दर्ज विधानसभा क्षेत्र, बूथ और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी उपलब्ध करानी थी। यही वजह है कि पहली बार वोटर बनने जा रहे युवाओं को लेकर सवाल उठे हैं।

आयोग का बयान, सर्वसम्मति से लिया गया फैसला 

जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने Form 6 में किए गए इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। जोशी ने इसी साल मई में कहा था कि Form 6 एक वैधानिक फॉर्म है, इसलिए इसमें कोई भी बदलाव करने के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन की जरूरत होगी। उनके मुताबिक, ऐसे बदलाव के लिए सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। संधू ने भी बाद में इसी रुख से सहमति जताई थी। अगस्त में संधू ने कथित तौर पर इस बदलाव को हटाने की मांग करते हुए कहा था कि इससे पात्र युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोगों को बिना जरूरत परेशानी हो सकती है। चुनाव आयोग ने बाद में इन विभागीय टिप्पणियों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि अंतिम फैसले पूरी आयोगीय व्यवस्था की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग 

कांग्रेस महासचिव ने फॉर्म-6 (Form 6) में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए ऑनलाइन फॉर्म में बदलाव किए गए हैं, जिसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव नए मतदाताओं के पंजीकरण पर पड़ेगा। रमेश ने दावा किया कि एक तरफ चुनाव आयोग युवा मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए अभियान चलाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर Form 6 में अतिरिक्त जानकारी मांगने से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए अब यह प्रक्रिया और जटिल होती दिख रही है। रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनके ये आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और चुनाव आयोग की ओर से फॉर्म-6 (Form 6) में किए गए बदलावों को लेकर एक अलग रुख या पक्ष सामने आया है। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है। 

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

इस मामले पर चुनाव आयोग ने भी अपना बयान जारी किया है। आयोग का कहना है कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, किसी भी निर्णय से पहले विभिन्न अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों की ओर से सुझाव या आपत्तियां आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। Form 6 को लेकर आयोग की ओर से यह भी तर्क सामने आया है कि मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाता है और पात्र नागरिकों को नाम दर्ज कराने के लिए किसी एसईआर का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

मतदाता सूची में नाम कैसे शामिल करा सकते हैं? 

कानूनी व्यवस्था के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिकों के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण का प्रावधान है। 2021 में कानून में बदलाव के बाद साल में चार qualifying dates रखी गई हैं—1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर। इसका मतलब है कि योग्य व्यक्ति या युवा संबंधित तारीख के आधार पर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची लगातार अपडेट होती रहती है और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया सिर्फ वार्षिक SSR तक सीमित नहीं है। योग्य लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत एसईआर की घोषणा का इंतजार किए बिना भी आवेदन कर सकते हैं।

SSR और SIR को लेकर भी बहस

मतदाता सूची के नियमित अपडेट के लिए Special Summary Revision यानी SSR और विशेष परिस्थितियों में Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया अपनाई जाती है। दोनों प्रक्रियाएं Representation of the People Act, 1950 की धारा 21 से जुड़ी हैं, लेकिन इन्हें हर साल एक साथ कराना कानूनन जरूरी नहीं है। इसी बीच 2026-27 के नियमित SSR की समय-सीमा को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सामान्य तौर पर इसकी घोषणा मई-जून के आसपास होती है, लेकिन इस बार SIR और चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों के बीच प्रक्रिया को लेकर देरी की चर्चा है।

2.73 करोड़ युवाओं के नाम जुड़ने का दावा

चुनाव आयोग के के अनुसार, 2025 में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 18 से 28 वर्ष की आयु के करीब 2.73 करोड़ नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। आयोग का कहना है कि इनमें पहली बार वोट देने वाले युवाओं के साथ वे लोग भी शामिल हैं, जो पहले हकदार हो चुके थे लेकिन बाद में उनका नाम सूची में जोड़ा गया है। इससे आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि SSR की प्रक्रिया में देरी का मतलब नए मतदाताओं के पंजीकरण पर रोक नहीं है। Form 6 में SIR से जुड़े सवाल को लेकर जारी विवाद ने खास तौर पर पहली बार वोट देने वाले युवाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की वैधानिक शक्तियों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल विवाद का एक अहम मुद्दा यह है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगने की कानूनी प्रक्रिया क्या थी और इस बदलाव का अंतिम अधिकार किसके पास है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां, राजनीतिक आरोप और न्यायिक कार्यवाही आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

राजीव गांधी के फैसले और मोदी सरकार की नीतियों की तुलना

युवा मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के फैसले की तुलना मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करते हुए कहा कि राजीव गांधी ने संसद के जरिए मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की थी, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार मिला। वहीं, रमेश का आरोप है कि 2024 के बाद से Summary Special Revision (SSR) की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाए जाने से नए युवाओं के नाम मतदाता सूची में जुड़ने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

कांग्रेस ने Gen Z को लेकर सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस ने दावा किया कि अगले साल उत्तर प्रदेश और गोवा में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, लेकिन वहां SSR नहीं होने के कारण मतदान की उम्र पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। पार्टी ने बिहार का भी हवाला दिया, जहां पिछले साल Special Intensive Revision (SIR) पूरा होने के बावजूद SSR शुरू नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को युवाओं के हालिया आंदोलनों से जोड़ते हुए दावा किया कि Gen Z के राजनीतिक रूप से सक्रिय होने से सरकार चिंतित है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश की गई, जिससे युवा मतदाताओं की भागीदारी प्रभावित हो।