“बोले सो निहाल…” CM धामी ने साझा किया Hemkund Sahib का दिव्य नजारा

“बोले सो निहाल…” CM धामी ने साझा किया Hemkund Sahib का दिव्य नजारा

उत्तराखंड में, बर्फ से ढकी चोटियों के बीच स्थित 'श्री हेमकुंड साहिब' न केवल एक पवित्र सिख तीर्थ है, बल्कि शांति और अद्भुत सुंदरता का अनूठा प्रतीक भी है। चमोली जिले में अवस्थित यह स्थल आस्था और प्रकृति के मेल का अनुपम उदाहरण है, जहां आने वाले सभी श्रद्धालु भक्ति में खो जाते हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में सिख तीर्थ स्थलों की अहमियत स्पष्ट दिखाई देती है। इस पवित्र स्थान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या वहां जुटती है। शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्थल के महत्व पर अपनी राय व्यक्त की।

उन्होंने 'श्री हेमकुंड साहिब' का एक विशेष वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने गुरुद्वारे के महत्व के बारे में लिखा, "बोले सो निहाल, सत श्री अकाल।"

चमोली जिले में स्थित श्री हेमकुंड साहिब लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हिमालय की शांत वादियों में बसा यह गुरुद्वारा मन को शांति और आत्मा को सुकून प्रदान करता है। यह सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य अनुभव का स्रोत भी है। यदि आप चमोली आते हैं, तो इस पवित्र स्थान के दर्शन अवश्य करें।

श्री हेमकुंड साहिब भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिख धार्मिक स्थल है, जो समुद्र तल से लगभग 15,200 फीट (4,632 मीटर) की ऊचाई पर सात बर्फीली चोटियों और एक झील के पास स्थित है।

सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा (दसम ग्रंथ) में इस स्थल पर अपनी पूर्वजन्म की तपस्या का उल्लेख किया है। गुरुद्वारे के समीप स्थित पौराणिक लोकपाल लक्ष्मण मंदिर है, जहां हिंदू मान्यता के अनुसार लक्ष्मण जी ने तप किया था।

इस स्थान पर बेहद ठंड और बर्फबारी के कारण साल में केवल 5 से 6 महीने (आमतौर पर मई/जून से अक्टूबर तक) तक ही यात्रा संभव होती है। हालांकि, गर्मियों का मौसम अभी बना हुआ है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में तापमान की वजह से लोग परेशान हैं, ऐसे में यहां यात्रा करना बेहद सुखद अनुभव होगा। इस पवित्र स्थल के शोर-शराबे से दूर शांत वातावरण में ध्यान लगाकर आत्मिक शांति पाई जा सकती है।