चेन्नई: सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी में तीन दोषियों को 5 साल की सजा

चेन्नई: सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी में तीन दोषियों को 5 साल की सजा

चेन्नई, 23 मई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने एक बड़े बैंक धोखाधड़ी प्रकरण में तीन आरोपियों को पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 22 मई 2026 को मेसर्स पलपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सेंथिल कुमार, पी.ए. सासी कुमार और पी. थंजई चेजियन को दोषी ठहराया। साथ ही, तीनों पर कुल 11.7 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। कंपनी पर 1.2 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगा है।

इस मामले की शुरुआत 14 नवंबर 2008 को भारतीय स्टेट बैंक, चेन्नई की शिकायत पर की गई थी। आरोप था कि कंपनी और उसके निदेशकों ने 'एक्सप्रेस क्रेडिट स्कीम' के तहत नकली कर्मचारियों के नाम पर व्यक्तिगत ऋण प्राप्त किए। इस अपराध के जरिए आरोपियों ने बैंक से 1.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद 11 दिसंबर 2009 को आरोप पत्र दायर किया गया। एक अन्य आरोपी जी. वैद्यनाथन, जिनका मुकदमे के दौरान निधन हो गया था, के खिलाफ कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया।

सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, आरोपियों की कंपनी सॉफ्टवेयर उद्योग से संबंधित थी। उन्होंने बैंक की योजना का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और काल्पनिक कर्मचारियों के नाम पर लोन प्राप्त किए, जिसका उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया।

सीबीआई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपियों ने साजिश बनाकर जानबूझकर बैंक को धोखा दिया, जिससे सार्वजनिक धन को नुकसान पहुंचा। अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोषी ठहराया।

यह निर्णय वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई की सख्त कदम उठाने की नीति को मजबूती प्रदान करता है। खासकर बैंकों के साथ निजी कंपनियों द्वारा किए गए धोखाधड़ी पर नजर रखने के लिए सीबीआई की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है।