छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम—जिसमें पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) शामिल हैं—ने कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक को अपनी कस्टडी में लिया है। आरोपी अतीक हुसैन पिछले 19 वर्षों से बिलासपुर में पहचान छिपाकर रह रहा था और एनटीपीसी (NTPC) सीपत प्लांट में लिफ्ट मेंटेनेंस का काम कर रहा था। जांच के दौरान उसके पास कई भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनके फर्जी तरीके से तैयार किए जाने का पुलिस ने दावा किया है।
2005 में भारत आने का दावा
पुलिस को पूछताछ में आरोपी ने अपना मूल पता बांग्लादेश के नारायणगंज जिले का बताया है। अधिकारियों के अनुसार, उसने बताया कि वह 2005 में भारत आया था। लगभग दो साल तक तमिलनाडु में रहा था। इसके बाद वह बिलासपुर पहुंचा और लंबे समय से यहीं रहकर अपनी गतिविधियां चला रहा था। इसके बाद वह यहां नौकरी करने लगा और लंबे समय तक सीपत स्थित एनटीपीसी से जुड़े लिफ्ट मेंटेनेंस के काम में रहा।
घर से कई दस्तावेज बरामद
पुलिस की टीम ने सरकंडा क्षेत्र की सूर्या विहार कॉलोनी स्थित उसके किराये के मकान पर दबिश दी। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से कई महत्वपूर्ण और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी), ड्राइविंग लाइसेंस के साथ-साथ स्थानीय निवास और जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज शामिल हैं।
पहले भी पुलिस की पकड़ में आया था
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले संदिग्ध लोगों की और सुरक्षा संबंधी जांच के दौरान पुलिस को इस व्यक्ति (अतीक) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। उस दौरान वह पुलिस की कार्रवाई से बचकर निकल गया था। इसके बाद एसटीएफ और जिला विशेष शाखा की टीम ने उसकी तलाश शुरू की। लगातार निगरानी और रेकी के बाद पुलिस ने 24 सितंबर को उसके ठिकाने का पता लगाया और वहां दबिश देकर उसे पकड़ लिया।
वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू
पुलिस ने अतीक को आगे की प्रक्रिया के लिए रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, उसे बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। फिलहाल, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां आरोपी से गहन पूछताछ कर रही हैं कि उसने इतने लंबे समय तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे देश में कैसे शरण ली और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।