मुंबई, 23 मई। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इस सप्ताह सोने की कीमतों में 0.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को एमसीएक्स गोल्ड जून फ्यूचर्स में 0.06 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, वहीं एमसीएक्स सिल्वर मई फ्यूचर्स में 0.09 प्रतिशत की कमी आई।
वर्तमान में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर गोल्ड फ्यूचर्स की कीमत 1,58,588 रुपए प्रति 10 ग्राम और सिल्वर फ्यूचर्स की कीमत 2,71,600 रुपए प्रति किलोग्राम बनी हुई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार, शुक्रवार को 999 प्यूरिटी वाले सोने के 10 ग्राम की कीमत 1,58,117 रुपए रही, जबकि सोमवार को यह 1,57,821 रुपए थी।
विश्लेषकों के मुताबिक, सप्ताह के अंत में सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई, क्योंकि कॉमेक्स गोल्ड 4,535 डॉलर के स्तर पर स्थिर नजर आया और रुपए में मजबूती आने से घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
मीडिया रिपोट्स में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति होने से कीमती धातुओं की खरीद में कुछ कमी आई, परंतु होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव ने सोने को निकट अवधि में समर्थन दिया।
विशेषज्ञों ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता से सकारात्मक संकेतों के कारण कॉमेक्स गोल्ड को 4,500 डॉलर के स्तर के आस-पास समर्थन मिल रहा है, लेकिन अंतिम परिणाम को लेकर अनिश्चितता बाजार में मौजूद है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 कैलेंडर वर्ष में भारत में सोने की मांग सालाना आधार पर 10 प्रतिशत या लगभग 50-60 टन कम हो सकती है, जिसका मुख्य कारण आयात शुल्क में बढ़ोतरी है।
सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जो अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। इससे जुलाई 2024 में शुल्क में कटौती पूरी तरह समाप्त हो गई है।
भविष्य में सोने की कीमतें अमेरिका-ईरान संबंधों, डॉलर इंडेक्स की प्रवृत्ति और रुपए के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेंगी।
विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ती बॉंड यील्ड निकट भविष्य में सोने और चांदी के लिए दबाव उत्पन्न कर सकती है। अमेरिका के 30 साल के ट्रेजरी बॉंड की यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जबकि 10 साल के बॉंड की यील्ड सप्ताह के अंत में 4.5 प्रतिशत से अधिक रही।
बॉंड यील्ड के बढ़ने के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 के अंत तक ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है, जिससे सोना और चांदी जैसे ब्याज मुक्त निवेश के साधनों रखने की लागत में वृद्धि हो सकती है।