भारतीय-अमेरिकी व्यापार नेताओं ने अदाणी मामले के बंद होने का किया स्वागत, बोले- रिश्वतखोरी का कोई प्रमाण नहीं

भारतीय-अमेरिकी व्यापार नेताओं ने अदाणी मामले के बंद होने का किया स्वागत, बोले- रिश्वतखोरी का कोई प्रमाण नहीं

वॉशिंगटन, 22 मई। अमेरिका में अदाणी ग्रुप के खिलाफ मामले के बंद होने की खबर पर भारतीय-अमेरिकी व्यापार नेताओं और नीति विश्लेषकों ने खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि यह मामला अमेरिकी कानून के दायरे से बाहर था और इसमें किसी तरह की गलती का ठोस प्रमाण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को नये सिरे से मजबूती मिलेगी और वैश्विक स्तर पर सक्रिय भारतीय कंपनियों में निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।

यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष डॉ. मुकेश अघी ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों की रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से काफी अधिक महत्ता है, और अदाणी ग्रुप से जुड़े मामले का त्वरित निवारण आवश्यक था, ताकि भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा, "इस मामले का सर्वथा अमेरिकी कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर होना हमें हैरान करता है कि इसे एक भारतीय कंपनी पर क्यों लगाया गया।"

अघी ने आगे कहा, "दूसरी ओर, रिश्वतखोरी के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। केवल अनुमान लगाए गए थे, और अनुमान के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है जब तक ठोस प्रमाण न हो।"

उन्होंने यह भी कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी निवेशक, विशेष रूप से अमेरिकी निवेशकों, का कोई धन नहीं डूबा है। इसलिये हमें लगता है कि अमेरिकी न्याय विभाग का निर्णय उचित था और इससे दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक प्रगति होगी।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के सलाहकार रहे डेमोक्रेट नेता अजय जैन भूटोरिया ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को सिद्ध नहीं कर सका।

उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह सकता कि मामला राजनीतिक प्रेरित था या नहीं, क्योंकि यह अदालत में चल रहा था। लेकिन अभियोजक अपने आरोपों को स्थापित करने में असफल रहे और उनके पास आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं थी।"

भूटोरिया ने बताया कि कई वर्षों से एमएजीए आंदोलन ने ऐसी संकीर्ण सोच को फैलाने का प्रयास किया है कि भारत और भारतीय-अमेरिकी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी रोजगार पर असर डाल रहे हैं। लेकिन अदाणी समूह का 10 अरब डॉलर का निवेश इस धारणाओं को पूरी तरह से गलत साबित करता है।

उन्होंने बताया कि इससे अमेरिका में भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रति धारणा में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा और यह साबित होगा कि भारतीय पूंजी अमेरिका की आर्थिक वृद्धि में एक प्रमुख भूमिका निभा सकती है।