भारतीय उत्पादों की पहचान बढ़ाने में 'जीआई' टैग की भूमिका

भारतीय उत्पादों की पहचान बढ़ाने में 'जीआई' टैग की भूमिका

नई दिल्ली, 22 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली और संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों की यात्रा केवल कूटनीतिक या आर्थिक समझौतों तक सीमित नहीं थी। इस यात्रा ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, पारंपरिक शिल्प और अद्वितीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद की। उन्होंने विदेशी नेताओं को असम का 'मूगा रेशम शॉल', गुजरात की 'रोगन पेंटिंग', और बिहार की 'मिथिला पेंटिंग' जैसे विशेष उपहार प्रदान किए, जो देश की विरासत को प्रदर्शित करते हैं।

प्रधानमंत्री ने प्रत्येक देश के नेताओं को जीआई टैग प्राप्त किए हुए भारतीय उत्पाद भेंट किए, जो 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना के तहत स्थानीय कारीगरों और किसानों की मेहनत का प्रतीक हैं। यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक ताकत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक और उदाहरण बन गई। आगरा की पच्चीकारी, मूगा रेशम, बिहार की मधुबनी पेंटिंग, ब्लू पॉटरी, रोगन आर्ट, कोफ्तगरी कटार, केसर आम, मेघालय अनानास और मिथिला मखाना जैसे उत्पाद विदेशी नेताओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बने।

भारत में 600 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिसमें कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, खाद्य सामग्री और हस्तकला शामिल हैं। पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री को आगरा की पच्चीकारी से सजी संगमरमर की पेटी, मूगा रेशम (गोल्डन सिल्क) और शिरुई लिली रेशम का शॉल भेंट किया। वहीं, नीदरलैंड में जयपुर की ब्लू पॉटरी, मीनाकारी कुंदन की बालियां और मिथिला पेंटिंग दी गईं। यूएई में रोगन पेंटिंग (जीवन वृक्ष) और कोफ्तगरी कटार के साथ मिथिला मखाना भेंट किया गया।

भारत की असली ताकत उसकी विविधता में निहित है। कश्मीर का केसर, बिहार का मखाना, बनारस की साड़ी, और कच्छ की रोगन कला जैसे उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये देश की मिट्टी, मेहनत और परंपरा की स्थायी पहचान हैं। जीआई टैग अब भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बन चुका है।

जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक किसी उत्पाद को उसके भौगोलिक मूल स्थान की पहचान प्रदान करता है। यह एक कानूनी सुरक्षा है, जो सुनिश्चित करती है कि उस उत्पाद का नाम केवल उसी क्षेत्र के असली उत्पादक ही इस्तेमाल कर सकें। जीआई टैग ने किसानों और स्थानीय कारीगरों की आय में इजाफा किया है, नकली उत्पादों से सुरक्षा प्रदान की है, सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है।

ये जीआई टैग भारत की विविधता को दर्शाते हैं। उत्तर प्रदेश के जीआई टैग उत्पाद सिर्फ खाद्य सामग्रियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और स्थानीय कारीगरी का प्रतीक भी हैं। मलिहाबाद का दशहरी आम, वाराणसी का लंगड़ा आम, बनारसी पान और प्रयागराज का अमरूद अपने विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं। महोबा का देशावरी पान, मुजफ्फरनगर का गुड़, हाथरस की हींग, प्रतापगढ़ का आंवला, लखनवी चिकनकारी, कानपुर चमड़ा, आगरा पच्चीकारी, लखनऊ के जूते, मथुरा पेड़ा और आजमगढ़ का कालीन अपने उत्कृष्ट गुण और विशिष्ट पहचान के कारण लोकप्रिय हैं।

बिहार के पारंपरिक खाद्य और कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने हेतु कई महत्वपूर्ण चीजों को जीआई टैग दिया गया है। नालंदा जिले का प्रसिद्ध सिलाव खाजा, जो कि 52 परतों वाली खस्ता मिठाई है। इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर की शाही लीची, मिथिला क्षेत्र का पौष्टिक मिथिला मखाना, मगध क्षेत्र का सुगंधित मगही पान, भागलपुर का स्वादिष्ट जरदालू आम, भागलपुर का सुगंधित कतरनी चावल और पश्चिम चंपारण का छोटे दाने वाला सुगंधित मार्चा चावल भी शामिल हैं।

कर्नाटक में मैसूर सिल्क, कोर्ग कॉफी, ब्याडगी मिर्च, नंजनगुड केला, उडुपी मट्टू गुल्ला बैंगन, मैसूर पान, देवनाहल्ली पोमेलो, धारवाड़ पेड़ा, नवलगुंड दरी, इल्कल साड़ी शामिल हैं। वहीं, केरल के पलक्कड़ मट्टा चावल, पोक्काली चावल, वायनाड जीरकसल चावल, कूर्ग संतरा, वजहकुलम अनानास, मरयूर गुड़, तिरूर सुपारी, नीलांबुर सागौन, और एथोमोझी नारियल भी जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं।

तमिलनाडु के जीआई टैग उत्पादों में कांचीपुरम सिल्क, मदुरै मल्लि, इरोड हल्दी, कोडाइकनाल मलाई पूंडू, पलनी पंचमीर्थम, श्रीविल्लीपुत्तूर पल्कोवा, कोविलपट्टी कदलाई मितई, नीलगिरि चाय, विरुपाक्षी पहाड़ी केला और तंजावुर पेंटिंग शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के तिरुपति लड्डू, गंंटूर मिर्च, बंगनपल्ले आम और कोंडापल्ली खिलौने भी जीआई टैग प्राप्त उत्पाद हैं।

तेलंगाना के जीआई टैग में हैदराबादी हलीम, पोचमपल्ली इकत, नरायणपेट साड़ी, वारंगल दरी, चेरियल स्क्रॉल पेंटिंग, तेलंगाना इमली, निजामाबाद ब्लैक पॉटरी शामिल हैं। झारखंड के जीआई टैग उत्पादों में सोहराय और कोहबर पेंटिंग, जर्दालू आम, डोकरा कला, तसर सिल्क, आदिवासी बांस कला, और कोदो मिलेट उत्पाद भी शामिल हैं।

असम का मूगा सिल्क, जोहा चावल, तेजपुर लीची, गुजरात का कच्छ रोगन आर्ट, पटोला साड़ी, सुरती पान, केसर आम, राजस्थान की ब्लू पॉटरी, कोफ्तगरी, बांडेज, झालावाड़ आम और जम्मू-कश्मीर का केसर, पश्मीना शॉल, बासमती चावल, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग चाय, शांतिनिकेतन चादर, और बंगाल रसगुल्ला भी जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में शामिल हैं। महाराष्ट्र का अल्फांसो आम, कोल्हापुरी चप्पल, पावन खंडी गुड़ और ओडिशा का कांजीवरण सिल्क, रसगोला, ओडिशा पान भी इस सूची में हैं।