मुंबई, 20 मई। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों और वैश्विक बाजारों के मिश्रित संकेतों के बीच, बुधवार के व्यापार में भारतीय शेयर बाजार ने हल्की बढ़त के साथ समाप्त किया। इस दिन सेंसेक्स 117.54 अंक या 0.16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 75,318.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 41 अंक या 0.17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23,659 का स्तर हासिल किया।
30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 74,806.49 पर खुला और इंट्रा-डे में 75,406.18 का उच्चतम और 74,529.41 का न्यूनतम स्तर देखा। दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 23,457.25 पर खुला और दिन के दौरान 23,690.90 का उच्चतम और 23,397.30 का न्यूनतम स्तर हासिल किया।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.04 प्रतिशत का मामूली उछाल नजर आया।
सेक्टर के हिसाब से, ऑयल एंड गैस में 1.59 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। इसके साथ ही, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल में भी तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी मीडिया में 1.45 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके साथ ही, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में भी कमज़ोरी देखने को मिली।
निफ्टी50 में हिंडाल्को, बजाज-ऑटो, ग्रासिम, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, विप्रो और इंडिगो के शेयरों में सबसे अधिक तेजी आई, जबकि बीईएल, टेक महिंद्रा, इटरनल, टाटा स्टील, एसबीआई लाइफ और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में गिरावट आई।
इस दौरान, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 459 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 461 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को इस दिन लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का लाभ हुआ।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, हाल की पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि ने तेल कंपनियों को बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने में मदद दी है, जिससे उनके लाभ की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। वहीं, ब्रेंट क्रूड, जो इस सप्ताह की शुरुआत में 111-112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब कारोबार के दौरान 105-106 डॉलर के आसपास स्थिर हो गया। कच्चे तेल की कीमतों में यह कमी और घरेलू ईंधन की कीमतों में वृद्धि ने रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद जगाई है, जिसके चलते एनर्जी सेक्टर में संस्थागत निवेशकों की खरीदी देखी गई।
एक बाजार विशेषज्ञ ने बताया कि भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 97 रुपए के करीब पहुंच गया है। रुपए पर दबाव मुख्यतः वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के चलते बना हुआ है।
विशेषज्ञ ने आगे बताया कि तकनीकी दृष्टिकोण से, निफ्टी के लिए 23,700 और 23,800 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस बन गया है, जहां मुनाफावसूली का दबाव उत्पन्न हो सकता है। इसके ऊपर 24,000 का स्तर सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस है।
नीचे की ओर, 23,500-23,600 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट बन गया है। यदि यह स्तर टूटता है, तो 23,300 अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट होगा, जहां पहले भी मजबूत खरीदारी देखी जा चुकी है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर निफ्टी 24,000 के ऊपर स्थिर रहता है, तो बाजार में फिर से मजबूती आ सकती है। लेकिन यदि 23,600 के ऊपर स्थिरता नहीं बनती, तो बाजार में फिर से बिकवाली और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।