रायपुर, 19 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद के भय से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और अब यहां विकास का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों के चेहरे पर अब उत्साह, आत्मविश्वास और भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई देती है। बंदूक के साये में जीने का दौर खत्म हो चुका है और पूरा बस्तर अब खुलकर सांस ले रहा है। गृह मंत्री ने अपने संबोधन में चार महत्वपूर्ण तिथियों का उल्लेख करते हुए नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और उसके बाद विकास की योजना को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पहली महत्वपूर्ण तिथि 13 दिसंबर 2023 थी, जब छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी। गृह मंत्री शाह ने कहा कि केंद्र में पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार थी, लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण नक्सलवाद के खिलाफ अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। उन्होंने दावा किया कि कई गैर-भाजपा सरकारों ने केंद्र का सहयोग किया, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस अभियान में साथ नहीं दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद बस्तर में बचे हुए नक्सलवाद को खत्म करने के लिए नए सिरे से अभियान शुरू किया गया। उन्होंने दूसरी महत्वपूर्ण तिथि 24 अगस्त 2024 बताते हुए कहा कि उस दिन सभी राज्यों के डीजी की बैठक के बाद यह घोषणा की गई थी कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम, साहस और बलिदान के कारण तय समयसीमा से पहले ही 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का संपूर्ण खात्मा हो गया। गृह मंत्री ने कहा कि चौथी और सबसे अहम तिथि 19 मई 2026 है, क्योंकि इस दिन से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संपूर्ण विकास की परिकल्पना को लॉन्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक कुछ बुद्धिजीवी यह कहते रहे कि विकास न पहुंचने के कारण नक्सलवाद फैला, जबकि सच्चाई यह थी कि नक्सलवाद की वजह से ही विकास इन इलाकों तक नहीं पहुंच पाया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर के विकास के लिए केंद्र सरकार अब नई योजनाओं पर काम शुरू कर चुकी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” की शुरुआत की गई है। यह पहल उन सुरक्षा कैंपों को विकास केंद्र में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिन्हें कभी नक्सलवाद से मुकाबला करने के लिए स्थापित किया गया था।
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में गृह मंत्रालय द्वारा करीब 200 सुरक्षा कैंप बनाए गए थे, जहां सीएपीएफ, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान तैनात रहते थे। अब जब क्षेत्र में नक्सलवाद कमजोर पड़ चुका है, तो इनमें से 70 कैंपों को “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इन सेवा डेरों के जरिए बस्तर के आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हर परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराई जाएगी। सहकारी मॉडल के माध्यम से दूध और डेयरी उत्पादों का विपणन देशभर में किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि अब बस्तर की पहचान डर और हिंसा से नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और समृद्धि से होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बस्तर देश के सामने प्रगति और बदलाव का नया उदाहरण बनेगा।