कोलकाता, 21 मई। पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी स्तरों के कर्मचारियों के लिए कई नये निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अंतर्गत कर्मचारियों को मीडिया में टिप्पणी करने, टीवी चर्चाओं में भागीदारी करने, सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने और राज्य सरकार की संवेदनशील जानकारियों को लीक करने से मना किया गया है। बुधवार रात को पश्चिम बंगाल के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के हस्ताक्षर से एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें बताया गया कि ये आदेश पहले से लागू अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम, 1968, पश्चिम बंगाल सेवा (सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य, अधिकार और दायित्व) नियम, 1980 और पश्चिम बंगाल सरकारी सेवक आचरण नियम, 1959 के तहत लागू किए गए हैं।
ये नई पाबंदियाँ राज्य सरकार के साथ काम करने वाले सभी आईएएस, पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस, पुलिस सर्विस के अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों, सुधारात्मक सेवाओं के कर्मियों, राज्य सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, बोर्डों, नगरपालिकाओं, नगर निगमों, तथा सरकारी उचित निकायों पर लागू होंगी।
अधिसूचना में किसी भी सरकारी कर्मचारी को प्रायोजित या निजी मीडिया कार्यक्रमों में या भारत सरकार द्वारा प्रायोजित लेकिन बाहरी संस्थाओं द्वारा निर्मित मीडिया में भाग लेने के लिए बिना पहले से अनुमति के पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अतिरिक्त, सरकारी कर्मचारियों को किसी भी दस्तावेज़ या जानकारी को मीडिया के साथ सीधे या परोक्ष रूप से साझा करने के लिए भी सरकारी अनुमति की आवश्यकता होगी, अन्यथा उन पर रोक होगी।
अन्य नियमों में सरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी समाचार पत्र, पत्रिका या अन्य प्रकाशनों में योगदान देने, रेडियो कार्यक्रमों में भाग लेने या किसी पत्रिका के लिए लेख लिखने पर पूर्ण रोक लगाई गई है।
अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि कोई सरकारी कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों या निर्णयों की आलोचना नहीं कर सकता है, चाहे वह मीडिया में हो या अन्य किसी प्रकार से।
अंततः, सरकार ने ऐसे किसी भी प्रकाशन, बातचीत या बयान पर रोक का निर्देश दिया है, जो राज्य सरकार और केंद्र सरकार, अन्य राज्यों या विदेशी सरकारों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है।