नई दिल्ली, 23 मई। बकरीद (ईद-उल-अजहा) के नजदीक आने के साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जानवरों की कुर्बानी को लेकर विवाद बढ़ने लगा है। इस बीच, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम में कुर्बानी एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रथा है, और हर मुसलमान को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए।
मौलाना महमूद मदनी ने ईद के अवसर पर कुछ सुझाव साझा किए हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा जारी एक बयान में उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया गया है, "कुर्बानी इस्लाम की एक अहम इबादत है, जो हर सक्षम मुसलमान पर अनिवार्य है। इस समय इसका कोई विकल्प नहीं है, इसलिए हर साहिबे हैसियत मुसलमान को अपनी कुर्बानी अदा करने का प्रयास करना चाहिए।"
उन्होंने सभी कुर्बानी देने वालों से अनुरोध किया कि वे सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और स्थानीय कानूनों का पूरी तरह से पालन करें। प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से बचने का भी उन्होंने आग्रह किया।
मौलाना ने कहा, "सफाई का ध्यान रखा जाए। जानवरों के अवशेष किसी भी सार्वजनिक स्थान पर न फेंके जाएं, बल्कि उन्हें प्लास्टिक बैग में डालकर विशेष स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। इस काम में नगरपालिका और सफाई कर्मचारियों का पूरा सहयोग किया जाए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी किसी गतिविधि से दूसरों को कोई असुविधा न हो।"
अपने बयान में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जानवरों की खरीद-फरोख्त और परिवहन के समय सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सख़्ती से पालन किया जाए। साथ ही, कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचना चाहिए। यदि किसी स्थान पर सांप्रदायिक तत्वों की ओर से उकसावे, धमकी या उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो धैर्य से काम लें और स्थानीय पुलिस या प्रशासन को तुरंत सूचित करें। किसी भी स्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें।
इसके अतिरिक्त, मुस्लिम समुदाय से अपील की गई है कि यदि कहीं कुर्बानी में कोई बाधा या समस्या उत्पन्न होती है, तो तुरंत जमीयत उलेमा-ए-हिंद या उसकी स्थानीय शाखाओं से संपर्क करें।