बच्चों को हीट स्ट्रोक से सुरक्षित कैसे रखें? डब्ल्यूएचओ ने साझा किए लक्षण और सुझाव

बच्चों को हीट स्ट्रोक से सुरक्षित कैसे रखें? डब्ल्यूएचओ ने साझा किए लक्षण और सुझाव

नई दिल्ली, 24 मई। देश के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी, लू और उमस का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इस स्थिति में बच्चों पर गर्मी से होने वाली बीमारियों का खतरा सबसे अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों की विशेष देखभाल करें और लू से बचने के उपाय अपनाएं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, गर्मी के मौसम में बच्चों का शरीर तेजी से गर्म होता है और वे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का शिकार बन सकते हैं। इसलिए माता-पिता को सतर्क रहना बेहद आवश्यक है।

गर्मी से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों में बच्चों का शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फारेनहाइट) या उससे अधिक हो जाना, तेज सिर दर्द, अत्यधिक पसीना आना, मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द, तेज हृदय गति और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। इसके अलावा, चक्कर आना, बेहोशी, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और उल्टी की अनुभूति भी लक्षणों में आती है।

डब्ल्यूएचओ ने जानकारी दी है कि अगर बच्चे को लू लग जाए, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। फर्स्ट ऐड के रूप में बच्चे को तुरंत छायादार स्थान या घर के अंदर ले जाएं। यदि बच्चा होश में है और सतर्क है, तो उसे छोटे-छोटे घूंट में पानी, ओआरएस या नींबू पानी दें। बच्चे को लिटाकर उसके पैरों को थोड़ा ऊंचा करें। इसके बाद ठंडे पानी से उसके शरीर को स्पंज करें। यदि बच्चा बेहोश हो जाता है तो उसे जबरदस्ती कुछ न दें। उल्टी होने पर बच्चे को करवट पर लिटाना चाहिए ताकि वह चोक न हो जाए।

संस्थान ने बताया है कि बेहोश बच्चे को पानी देने की कोशिश न करें। बच्चे को सीधी धूप में न छोड़ें और भारी या गर्म कपड़े न पहनाएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभिभावकों से यह भी अनुरोध करते हैं कि वे बच्चों को दोपहर में बाहर न निकालें। बाहर जाते समय पानी की बोतल, टोपी और छाता अवश्य साथ रखें। बच्चों को हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि थोड़ी-सी सावधानी बरतकर बच्चों को गर्मी से संबंधित गंभीर समस्याओं से बचाया जा सकता है। साथ ही लक्षण दिखाई देते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।