समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को करीब 11 महीने बाद रामपुर जेल से रिहाई मिली, लेकिन उनकी आजादी कुछ ही देर तक कायम रह सकी। शनिवार शाम जेल से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम जेल से रिहा होकर घर पहुंच गए। ED की लखनऊ जोनल टीम 16 अधिकारियों के साथ चार वाहनों में रामपुर जेल पहुंची थी। एजेंसी के अधिकारियों ने आजम खान को हिरासत में लेने के बाद गाजियाबाद ले जाया। अब उन्हें संबंधित अदालत में पेश कर कस्टडी रिमांड मांगे जाने की तैयारी है।
दो पैन कार्ड मामले में मिली थी जमानत
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी। अदालत ने 29 अक्टूबर को दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी। इसके बाद रामपुर जेल में रिहाई से जुड़ी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। दोनों को इस मामले में नवंबर 2025 में सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए और उनका इस्तेमाल किया था। हाईकोर्ट ने जमानत तो दे दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की थी। शनिवार शाम दोनों पिता-पुत्र जेल से बाहर आए। अब्दुल्ला आजम अपने घर चले गए, जबकि आजम खान को ED ने एक अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया।
जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल का आरोप
ED की कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हुई है। एजेंसी का आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया और खर्च की गई रकम के स्रोत को लेकर गंभीर विसंगतियां हैं। जांच के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर की जमीन और 59 इमारतों के निर्माण पर कुल खर्च करीब 499.09 करोड़ रुपये आंका गया। ED का दावा है कि वैध स्रोतों से केवल 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब मिला। बाकी 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत को लेकर एजेंसी ने सवाल उठाए हैं। ED ने 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर की जमीन और भवनों से जुड़ी 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है।
PWD के ठेकों और सरकारी फंड की भी जांच
जांच का दायरा केवल विश्वविद्यालय के निर्माण तक सीमित नहीं है। ED करीब 186 करोड़ रुपये के लोक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकों से जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। एजेंसी के मुताबिक, संबंधित कंपनी के प्रबंध निदेशक ने अपने बयान में ठेके की रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किए जाने की बात कही थी। इसके अलावा स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के कार्यों और जल निगम के जरिए कराए गए निर्माण की भी जांच की जा रही है। ED इन परियोजनाओं के भुगतान, बैंक लेनदेन और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर सरकारी धन के कथित इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
गाजियाबाद की अदालत में पेश कर रिमांड मांगेगी ED
ED की टीम आजम खान को गाजियाबाद की संबंधित अदालत में पेश करेगी। एजेंसी उनसे जौहर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और धन के स्रोत को लेकर पूछताछ करना चाहती है। इसके लिए अदालत से कस्टडी रिमांड मांगी जाएगी। रिमांड कितने दिनों की मिलेगी, इसका फैसला अदालत करेगी। इस मामले में ED की जांच वर्ष 2019 में दर्ज ECIR से जुड़ी है। एजेंसी ने जौहर विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से संबंधित वित्तीय गतिविधियों की लंबे समय से जांच की है।
गिरफ्तारी पर आजम खान और अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
जेल से बाहर आते ही ED की कार्रवाई पर आजम खान ने नाराजगी जाहिर की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें मुसलमान होने की सजा मिल रही है। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने विश्वविद्यालय और बच्चों के लिए स्कूल बनाए, यही उनका गुनाह बताया जा रहा है।वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों के जरिए साजिश की जा रही है और उन्हें बार-बार जेल भेजना गलत है। अखिलेश ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया। करीब 11 महीने बाद जेल से बाहर आए आजम खान की रिहाई के कुछ ही समय बाद हुई इस गिरफ्तारी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर गाजियाबाद की अदालत में होने वाली सुनवाई और ED की रिमांड मांग पर रहेगी।