नई दिल्ली, 22 मई। आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में समय की कमी और कार्यों की अधिकता के कारण मानसिक तनाव और ध्यान की कमी अक्सर देखी जाती है। इस हलचल भरे समाज में, जहां हर कोई मानसिक शांति की खोज में जुटा है, 'पद्मासन' एक प्रभावी और प्राकृतिक योग मुद्रा है, जो बिना किसी कठिनाई के हमारे शरीर और मन को गहरा विश्राम पहुँचाने में सहायता करती है। पद्मासन का नाम 'पद्म' से आया है, जिसका अर्थ कमल का फूल है। यह केवल एक शारीरिक स्थिति नहीं है, बल्कि यह आधुनिक मानसिक थकावट को दूर करने और ध्यान में नई ऊर्जा भरने के लिए एक दिव्य साधन है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने पद्मासन के फायदों पर प्रकाश डाला है। मंत्रालय के मुताबिक, यह एक स्थिर और सुखद ध्यान मुद्रा है, जो मानसिक शांति लाने, एकाग्रता को बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में बेहद प्रभावी है। इस आसन को योग अनुशासन का आधार माना जाता है।
जो लोग नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करते हैं, उनके छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार में सुधार होता है, मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सामान्य होता है। यह योग साधकों के लिए आंतरिक शक्ति को जागृत करने का एक प्रभावशाली तरीका माना जाता है।
इस आसन को करना आसान है। इसके लिए पहले एक योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। फिर दाहिने घुटने को मोड़कर दाहिने पैर को बायीं जांघ पर इस तरह रखें कि पैर का तलवा ऊपर की ओर हो और एड़ी नाभि के पास रहे। इसी प्रकार बाएं घुटने को मोड़कर बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखें। रीढ़ की हड्डी और गर्दन को सीधा रखते हुए, हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। अभ्यास करते समय अपने शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें; हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।
अगर किसी को घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द है, तो इस आसन को करने से बचें। पैरों को ज़ोर से मोड़ने या घुटनों को जमीन पर दबाने का प्रयास न करें।