कच्छ में ऊंटनी के दूध से आई नई श्वेत क्रांति, पशुपालकों की बदली जिंदगी

कच्छ में ऊंटनी के दूध से आई नई श्वेत क्रांति, पशुपालकों की बदली जिंदगी

कच्छ के रेगिस्तानी क्षेत्र में ऊंटनी का दूध सैंकड़ों परिवारों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। पहले ऊंटनी का दूध बेहद कम दाम पर बिकता था, लेकिन गुजरात सरकार के प्रयासों से कच्छ की सरहद डेयरी ने दूध खरीदने की व्यवस्था स्थापित की है, जिसके तहत ऊंट पालकों को 50 से 55 रुपए प्रति लीटर भुगतान किया जा रहा है। ऊंट पालक अब दूध बेचने और भुगतान मिलने में किसी भी तरह की कठिनाई का सामना नहीं कर रहे हैं।

आशाभाई रबारी ने कहा कि पूर्व में उनकी जिंदगी कठिनाइयों से भरी थी। लेकिन, सरकार के सहयोग और डेयरी संघटन के मार्गदर्शन ने उनके ऊंटों की जिंदगी में सुधार किया है। अब उनकी दैनंदिन जिंदगी काफी सरल हो गई है।

देवाभाई रबारी ने बताया कि ऊंट का दूध डेयरी में जाकर 50 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिकता है।

असली में, ऊंट पालकों का कोई निश्चित ठिकाना नहीं होता है, इसलिए उन्हें चारे की तलाश में भटकना पड़ता है, जो दूध बेचना कठिन कर देता है। लेकिन, सरहद डेयरी ने इसे सरल बना दिया है। यह देश की पहली डेयरी है जो ऊंटनी का दूध खरीदती है और उसे प्रोसेस करके दूध, पनीर और आइसक्रीम जैसे कई उत्पाद बनाती है।

सरहद डेयरी ने 2025-26 में प्रतिदिन औसतन 5,158 लीटर दूध की खरीदारी की है, जो पिछले वर्ष 4,754 लीटर की तुलना में 8.50 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल ऊंट पालकों को 8.72 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था, जबकि इस साल यह राशि बढ़कर लगभग 9.60 करोड़ रुपए हो गई है, जिससे दूध उत्पादकों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।

सरहद डेयरी के चेयरमैन वलमजी हुंबल ने कहा कि यहां भारत में सरहद डेयरी का पहला प्लांट है जहाँ ऊंट पालकों को 51 रुपए प्रति लीटर का भुगतान किया जाता है।

बता दें कि ऊंट के दूध को सुपरफूड की श्रेणी में रखा गया है और इसका औषधीय महत्व काफी अधिक है। टीबी, डायबिटीज, ऑटिज्म और अन्य गंभीर बीमारियों में इसका उपयोग लाभकारी हो सकता है, इसलिए इसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह बढ़ रही है।

हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. अलप अंतानी ने बताया कि टीबी के मरीजों और शरीर में सूजन कम करने के लिए ऊंट के दूध का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरहद डेयरी ने न केवल ऊंट पालकों को संगठित बाजार उपलब्ध कराया है, बल्कि ऊंट खरीदने के लिए ऋण की सुविधा भी प्रदान की है। इसके चलते ऊंटों की मांग और कीमतें दोनों में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप, अब बड़ी संख्या में युवा पशुपालक इस क्षेत्र में शामिल हो रहे हैं, जिससे कच्छ में एक नई श्वेत क्रांति का आगाज हो रहा है।