तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच क्या है भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए आज के रेट

तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच क्या है भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए आज के रेट

दुनिया भर के बाजारों में उथल-पुथल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय मिडिल क्लास के लिए राहत की खबर है। 14 मार्च 2026 को भी देश की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 37% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद भारत में फिलहाल ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं।

बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम

तेल कंपनियों द्वारा आज सुबह 6 बजे जारी रेट्स के अनुसार प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं (पेट्रोल / डीजल रुपये प्रति लीटर):

नई दिल्ली – 94.72 / 87.62

मुंबई – 104.21 / 92.15

कोलकाता – 103.94 / 90.76

चेन्नई – 100.75 / 92.34

अहमदाबाद – 94.49 / 90.17

बेंगलुरु – 102.92 / 89.02

हैदराबाद – 107.46 / 95.70

जयपुर – 104.72 / 90.21

लखनऊ – 94.69 / 87.80

पुणे – 104.04 / 90.57

चंडीगढ़ – 94.30 / 82.45

इंदौर – 106.48 / 91.88

पटना – 105.58 / 93.80

सूरत – 95.00 / 89.00

नासिक – 95.50 / 89.50

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की इस तेजी ने कई देशों में ईंधन की कीमतों को बढ़ाने का दबाव बनाया है।

क्यों नहीं बढ़े भारत में दाम?

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रहने के पीछे दो प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं।

  1. तेल कंपनियां उठा रही हैं घाटा
  2. तेल कंपनियां फिलहाल उपभोक्ताओं को अचानक झटका देने से बचाने के लिए खुद नुकसान सह रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनियां रोजाना करीब 2000 करोड़ रुपये तक का घाटा उठा रही हैं, ताकि आम जनता पर महंगाई का दबाव न बढ़े।
  3. सरकार की रणनीति और तेल भंडार
  4. सरकार का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार नहीं करती, तब तक घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर कीमत बढ़ाने की संभावना कम है। इसके अलावा देश के पास पर्याप्त तेल भंडार (Reserves) भी मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट को संभालने में मदद मिल सकती है।

रुपये पर भी बढ़ा दबाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिल रहा है। रुपया कमजोर होकर आज 92.37 प्रति डॉलर के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है, ताकि रुपये को सहारा दिया जा सके और देश का आयात बिल ज्यादा न बढ़े।