मुंबई, 18 मई (आईएएनएस)। अभिनेत्री अनुप्रिया गोयनका इन दिनों अपनी नई फिल्म 'बॉम्बे स्टोरीज' को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यह फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जा रही है। किसी भी कलाकार के लिए कान्स तक पहुँचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है और अनुप्रिया के लिए यह अवसर बेहद खास है, क्योंकि यह उनकी पहली स्वतंत्र फिल्म है। फिल्म का निर्देशन राहत शाह काजमी ने किया है और इसकी कहानी प्रसिद्ध लेखक सआदत हसन मंटो की चर्चित कहानी 'हतक' से प्रेरित है।
फिल्म 'बॉम्बे स्टोरीज' में अनुप्रिया गोयनका एक सेक्स वर्कर के किरदार में नजर आ रही हैं। उनके साथ इस फिल्म में मौनी रॉय और सुष्मिता सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। इस फिल्म में सेक्स वर्कर्स के जीवन, उनके संघर्ष, समाज के दृष्टिकोण और उनके भीतर की भावनाओं को उजागर करने का प्रयास किया गया है। अपने किरदार के बारे में बात करते हुए अनुप्रिया ने कहा, ''मैं लंबे समय से स्वतंत्र सिनेमा का हिस्सा बनना चाहती थी। मुझे बेहद खुशी है कि मेरी पहली फिल्म मंटो की कहानी पर आधारित है। 'हतक' का अर्थ अपमान है और फिल्म की कहानी इसी भावना के इर्द-गिर्द घूमती है। मेरा किरदार समाज की नजरों और लोगों के निर्णयों के बीच खुद को समझने की कोशिश करती है।''
अनुप्रिया ने अपने किरदार को समझाते हुए कहा, ''सौगंधी एक ऐसी महिला है, जिसने अपनी जिंदगी को स्वीकार कर लिया है, लेकिन उसके दिल में प्यार और सम्मान पाने की चाहत भी है। वह चाहती है कि लोग उसे सिर्फ एक वस्तु के रूप में न देखें, बल्कि एक इंसान और एक महिला के रूप में समझें। इस किरदार में मैंने अपनी कई भावनाएं देखीं। मैंने इसे निभाते हुए एक महिला के विभिन्न पहलुओं को समझा और महसूस किया।'' उन्होंने सेक्स वर्क के बारे में कहा, ''यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से यह काम चुनता है, तो यह उसका अधिकार है। इसे अन्य पेशों की तरह ही देखा जाना चाहिए। लेकिन जब किसी महिला को मजबूरी में इस काम में धकेला जाता है, उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं या उसे मानवता का सम्मान नहीं मिलता, तब यह गलत और दुखद बन जाता है।'' अनुप्रिया ने समाज में सेक्स वर्कर्स के प्रति दृष्टिकोण पर कहा, ''समाज में सेक्स वर्कर्स को अक्सर सिर्फ एक वस्तु के रूप में देखा जाता है, जबकि उनके भी सपने और भावनाएं होती हैं। जब तक किसी को उसकी इच्छा के खिलाफ इस काम में मजबूर नहीं किया जाता, तब तक समाज को उसे जज करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।''