नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए नए व्यापार और रक्षा समझौतों को लेकर बांग्लादेशी मीडिया में गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। ढाका के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' में प्रकाशित एक लेख में इन समझौतों की तुलना ब्रिटिश शासनकाल की 'औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था' से की गई है। ढाका विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर मोशाहिदा सुल्ताना द्वारा लिखे गए लेख में कहा गया है कि अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता बांग्लादेश के लिए फायदे और जोखिम दोनों लेकर आया है। समझौते के तहत बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स को अमेरिकी बाजार में 'जीरो ड्यूटी', यानी बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा, लेकिन इसके बदले शर्त रखी गई है कि इन उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कपास और फाइबर अमेरिका से ही आयात करना होगा। लेख में कहा गया कि बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग वर्षों की मेहनत, निवेश और कौशल से खड़ा हुआ है, लेकिन अब यह अमेरिकी कपास और अमेरिकी कृषि नीतियों पर निर्भर होता जा रहा है। यदि भविष्य में अमेरिका अपनी नीतियां बदलता है, कपास की आपूर्ति घटती है या नई शर्तें लागू करता है, तो इसका सीधा असर बांग्लादेश की फैक्ट्रियों, श्रमिकों की नौकरियों और बैंकिंग व्यवस्था पर पड़ेगा। लेख में 19वीं सदी के ब्रिटेन-भारत व्यापार मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा गया कि जिस तरह उस दौर में भारत को कच्चा माल सप्लाई करने और तैयार माल खरीदने वाले बाजार में बदल दिया गया था, उसी तरह आज 'जीरो ड्यूटी लेकिन अमेरिकी कपास का इस्तेमाल जैसी शर्तें बांग्लादेश के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र को अमेरिकी हितों से जोड़ रही हैं। रक्षा समझौतों को लेकर भी लेख में चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया कि आधुनिक रक्षा और व्यापार समझौते धीरे-धीरे देशों को अमेरिकी रक्षा तंत्र पर निर्भर बना देते हैं। लेख के अनुसार बांग्लादेश पर अमेरिकी निगरानी प्रणाली, संचार उपकरण और हथियार खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि रूस और चीन से दूरी बनाने के संकेत दिए जा रहे हैं। लेख में कहा गया कि इससे बांग्लादेश की रक्षा खरीद अमेरिकी प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर, हथियार, स्पेयर पार्ट्स और लाइसेंस व्यवस्था पर निर्भर हो जाएगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार अमेरिकी कंपनियों की ओर बहने लगेगा। इसके अलावा, अमेरिका से महंगे बोइंग विमान खरीदने को लेकर भी चिंता जताई गई है।
अमेरिका के साथ व्यापार और रक्षा सौदों के कारण बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को झटका लगने की आशंका