ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और भारी डिस्काउंट के खिलाफ बुधवार, 20 मई 2026 को देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि ई-फार्मेसी और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी के काम कर रहे हैं, जिससे दवा कारोबार और मरीजों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
12.5 लाख से ज्यादा दवा दुकानें बंद रहने का दावा
AIOCD के मुताबिक, इस विरोध प्रदर्शन में देशभर के करीब 12.5 लाख केमिस्ट शामिल होंगे। बिहार में भी लगभग 40 हजार मेडिकल स्टोर बंद रहने की बात कही गई है। संगठन का दावा है कि देशभर में दवा दुकानों को एकजुट कर बंद रखा जाएगा।
अस्पतालों और बड़ी फार्मेसी चेन पर असर नहीं
देशव्यापी बंद के बावजूद कई जरूरी मेडिकल सेवाएं जारी रहेंगी। अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, बड़ी फार्मेसी चेन, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी खुले रहेंगे। इसके अलावा कई राज्यों की फार्मेसी एसोसिएशनों ने भी बंद में शामिल न होने का फैसला किया है।
कई राज्यों ने दवा आपूर्ति सामान्य रहने का दिया भरोसा
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के रिटेल फार्मेसी संगठनों ने लिखित आश्वासन दिया है कि उनके राज्यों में दवाओं की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, कर्नाटक के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश में बंद का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
ई-फार्मेसी पर नियमों के उल्लंघन का आरोप
AIOCD का कहना है कि हाल ही में उसके प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय दवा नियामक से मुलाकात कर ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर अपनी चिंताएं साझा की थीं। संगठन का आरोप है कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर कई बार बिना सही जांच के दवाएं बेची जा रही हैं।
‘प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन बिक्री खतरनाक’
प्रभाकर कुमार ने कहा कि खुदरा मेडिकल स्टोर सख्त प्रिस्क्रिप्शन सिस्टम के तहत काम करते हैं और एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाओं व गर्भपात किट जैसी संवेदनशील दवाओं का रिकॉर्ड रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी के जरिए इन दवाओं तक ऑनलाइन पहुंच आसान हो गई है और नकली पर्चों के इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ रही है।
नियामक ने समीक्षा का दिया भरोसा
सूत्रों के मुताबिक, दवा नियामक ने संगठन को भरोसा दिलाया है कि ई-फार्मेसी से जुड़े मुद्दों और नियमों की सक्रिय रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही खुदरा दवा कारोबारियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए नियामक ढांचे को मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है।