उत्तराखंड, 21 मई। देवभूमि उत्तराखंड के पंचकेदारों की विशिष्टता अनोखी है। इस पवित्र स्थान पर द्वितीय केदार के रूप में भगवान श्री मदमहेश्वर की पूजा की जाती है। चौखंबा पहाड़ की तलहटी में स्थापित यह मंदिर केवल प्राकृतिक नज़ारों का स्थल नहीं है, बल्कि यह महाभारत काल के इतिहास और आस्था का प्रतीक भी है।
हिमालय की गोद में बसा यह अद्भुत धाम अपनी महिमा के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मंदिर की विशेषताओं के बारे में बताया।
सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा किया, जिसमें मंदिर का मनोरम दृश्य प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, "रुद्रप्रयाग जिले में स्थित श्री मदमहेश्वर मंदिर, पंच केदारों में दुसरे केदार के नाम से मशहूर है। यह पवित्र स्थल ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है।"
सीएम ने यह भी कहा, "यदि आप रुद्रप्रयाग आएं, तो इस दिव्य धाम के दर्शन अवश्य करें और देवभूमि की आध्यात्मिक शांति और सुंदरता का अनुभव प्राप्त करें।"
मदमहेश्वर मंदिर, जिसे मदमहेश्वर भी कहा जाता है, गढ़वाल हिमालय में स्थित भगवान शिव का एक revered स्थल है। यह पंच केदार में 'द्वितीय केदार' के रूप में पूजा जाता है, जहाँ भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा की जाती है। यह स्थान समुद्र तल से लगभग 3,497 मीटर (11,473 फीट) ऊँचाई पर है और इसकी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए जाना जाता है।
इस मंदिर का ऐतिहासिक संबंध महाभारत काल से है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपनी पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु इस मंदिर की स्थापना की थी। माना जाता है कि भीम ने इसका निर्माण करवाया था।
यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले के गौंडार गांव (मंसूना) में स्थित है। मंदिर के पीछे चौखंबा और केदारनाथ पर्वत की चोटियों का अद्भुत दृश्य मौजूद है। मंदिर के दरवाजे हर साल सर्दियों में बंद हो जाते हैं और गर्मियों में पुनः खोले जाते हैं। वर्ष 2026 में मंदिर के कपाट 21 मई को खोले जाएंगे।