पश्चिम एशिया संकट के चलते सरकार के उर्वरक सब्सिडी बिल में हुई भारी वृद्धि

पश्चिम एशिया संकट के चलते सरकार के उर्वरक सब्सिडी बिल में हुई भारी वृद्धि

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत बढ़ने से चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब 15,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने सब्सिडी खर्च बढ़ने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इसमें कितनी प्रतिशत वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, "सब्सिडी बिल जरूर बढ़ेगा, लेकिन यह कितने प्रतिशत बढ़ेगा, फिलहाल मैं नहीं कह सकती।" लागत बढ़ने के बावजूद शर्मा ने कहा कि 2026 खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता 'संतोषजनक' बनी हुई है। कुल 390 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक उपलब्ध है और बाकी जरूरत को विभिन्न देशों से आयात के जरिए पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में उर्वरकों का कुल भंडार 200.9 लाख टन है। शर्मा ने कहा, "कुल मिलाकर स्थिति मजबूत, स्थिर और आरामदायक बनी हुई है।" देश में घरेलू उत्पादन करीब 80,000 टन प्रतिदिन की दर से चल रहा है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से अब तक 86.2 लाख टन उर्वरक उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 93 लाख टन था। उन्होंने कहा कि यूरिया संयंत्रों के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति उपलब्ध है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के क्षेत्रों से उर्वरकों का आयात बढ़ाया है और अब तक करीब 22 लाख टन उर्वरक आयात किए जा चुके हैं। उर्वरक विभाग यूरिया और जटिल उर्वरकों के उत्पादन के लिए जरूरी अन्य कच्चे माल की उपलब्धता की भी समीक्षा कर रहा है। इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए हर सप्ताह सब्सिडी भुगतान किया जा रहा है। पीक डिमांड यानी मांग चरम पर होने के दौरान, किसी भी प्रकार की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट के लिए संयुक्त वैश्विक निविदाएं शुरू की हैं। इसके अतिरिक्त, 5.36 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और 5.94 लाख मीट्रिक टन सल्फर सहित कच्चे माल की खरीद के लिए भी निविदाएं प्रक्रियाधीन हैं। सरकार ने यह भी पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से खरीदे गए लगभग 7 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक मई और ज