मुंबई में 20 मई को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने महाराष्ट्र लोक भवन में तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें पद्म श्री भीकू (दादा) इदाते की 'समरसता का तीर्थयात्री' शामिल है, जो मराठी पुस्तक 'समरसतेचा वारकरी' का अंग्रेजी संस्करण है।
नीलिमा देशपांडे द्वारा लिखी गई इस किताब का अनुवाद ऋतुराज पाटकी ने किया है, और इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की प्रस्तावना भी शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान, राज्यपाल ने उद्योगपति डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई द्वारा लिखी गई दो किताबें 'आधुनिक शेतीचे मॉडेल' और 'आपला कोकण' का भी विमोचन किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि भीकू इदाते की रचना 'समरसता का तीर्थयात्री' पाठकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समरसता आंदोलन को समझने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि आज के डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व बना हुआ है और भौतिक पुस्तकें पढ़ने का अनुभव अद्वितीय है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि युवा पीढ़ी किताबें नहीं पढ़ती। उन्होंने कहा कि युवा पढ़ रहे हैं, बस उनका तरीका बदल गया है। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि लोग जन्मदिन, विवाह और अन्य अवसरों पर किताबें उपहार देने की परंपरा शुरू करें।
भीकू इदाते ने अपने भाषण में 'समरसता मंच' के गठन, इसके द्वारा चलाए गए आंदोलनों, 'फुले-अंबेडकर संदेश यात्रा' और विमुक्त तथा घुमंतू समुदायों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपनी सामाजिक यात्रा के अनुभव भी साझा किए।
डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई ने अपनी रचनाओं 'आधुनिक शेतीचे मॉडेल' और 'आपला कोकण' पर भी प्रकाश डाला।
इस पुस्तक विमोचन समारोह में हिंदुस्तान प्रकाशन संस्था के पद्म श्री रमेश पतंगे, साप्ताहिक 'विवेक' और पीतांबरी समूह के कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
भीकू इदाते 'भटके विमुक्त विकास परिषद' के संस्थापक अध्यक्ष और 'समरसता मंच' के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। यह कार्यक्रम समरसता और सामाजिक विकास के संदेश को फैलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।