नई दिल्ली, 21 मई। दक्षिण कोरिया में 'इंडियन वॉर मेमोरियल' का उद्घाटन किया गया है। कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह स्मारक भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) की बहादुरी, बलिदान और मानवीय सेवा को समर्पित है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पैट्रियट्स एवं वेटरन्स अफेयर्स मंत्री क्वोन ओह-यूल ने गुरुवार को सियोल के इमजिंगक पार्क में इस स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस मौके पर भारतीय सैनिकों के अद्भुत बलिदान की याद में एक विशेष संस्मरण भी प्रकाशित किया गया।
इस अवसर पर भारत और दक्षिण कोरिया के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए, जिसका उद्देश्य कोरियाई युद्ध के पूर्व सैनिकों का सम्मान करना और आपसी सहयोग को बढ़ाना है। भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद में एक विशेष संस्मरण भी जारी किया गया।
यह ध्यान देने योग्य है कि कोरियाई युद्ध के समय भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों की चिकित्सा की थी। इस यूनिट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. एजी रंगराज के पास थी। भारतीय सैनिकों की अद्वितीय बहादुरी के कारण उन्हें 'मैरून एंजेल्स' के नाम से जाना जाता था।
डॉ. रंगराज को उनके अद्वितीय योगदान के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। भारत ने युद्धविराम के बाद भी कोरियाई युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेफ्टिनेंट जनरल केएस थिमैया के नेतृत्व में, भारत ने न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रिएशन कमीशन की अध्यक्षता की। इस आयोग का गठन 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते के बाद युद्धबंदियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने इस कार्य को निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ निभाया था, जिसके लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।
इसलिए, लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का नेतृत्व आज भी भारत के शांति और कूटनीति में सकारात्मक योगदान का प्रतीक माना जाता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि यह स्मारक वहीं बनाया गया है जहाँ 1954 में कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने 'हिंद नगर' की स्थापना की थी, जहाँ लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनकी सुरक्षित वापसी तक रखा गया था। इस परियोजना का वित्तपोषण भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया है। गुरुवार को दोनों देशों के मंत्रियों ने इस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवाओं को दक्षिण कोरिया आज भी सच्चे सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और मानवीय सहायता के लिए भारत का योगदान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों के योगदान को याद करना भारत और दक्षिण कोरिया के लोगों के रिश्तों को और भी मजबूत करेगा। यह दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता को नई पहचान प्रदान करेगा।
उन्होंने स्मारक के निर्माण में सहयोग देने के लिए दक्षिण कोरिया सरकार और पैट्रियट्स एवं वेटरन्स अफेयर्स मंत्रालय का आभार भी व्यक्त किया। वहीं, दक्षिण कोरिया के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका की सराहना की और भारतीय सैनिकों के बलिदान को दोनों देशों की स्थायी मित्रता का प्रतीक बताया।
इस अवसर पर भारत और कोरिया के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, युद्धवीर, राजनयिक समुदाय के सदस्य और कई विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. एजी रंगराज की भतीजी कल्पना प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद थीं। दक्षिण कोरिया के पैट्रियट्स एवं वेटरन्स अफेयर्स मंत्रालय ने इस महीने को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है।