Mahakaleshwar Jyotirlinga में बुधवार तड़के बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए।
‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
भस्म आरती के दौरान जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा के निराकार और साकार दोनों रूपों के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
वीरभद्र से आज्ञा लेकर खुले मंदिर के कपाट
परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र से अनुमति ली गई, जिसके बाद मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। यह जल मंदिर परिसर स्थित कोटितीर्थ कुंड से लाया जाता है।
पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार
हरिओम जल अर्पित करने के बाद बाबा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। फिर भांग, सूखे मेवे, बेलपत्र और चंद्र से भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा को त्रिपुर तिलक और दिव्य वस्त्र धारण कराए गए, जिसके बाद भस्म आरती संपन्न हुई।
क्या है बाबा के निराकार और साकार रूप का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा महाकाल का निराकार रूप जन्म और मृत्यु से परे माना जाता है, जबकि साकार रूप सांसारिक जीवन का प्रतीक है। भस्म आरती में इन दोनों स्वरूपों के दर्शन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखते हैं।
भस्म आरती में शामिल होने के नियम
भस्म आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों को धोती और अंगवस्त्र पहनना अनिवार्य होता है। वहीं महिलाओं के लिए साड़ी पहनना जरूरी है। कुर्ता-पैंट या अन्य आधुनिक परिधान मान्य नहीं होते।
अब चिता की भस्म की जगह होता है यह उपयोग
प्राचीन समय में भस्म आरती में चिता की भस्म का उपयोग किया जाता था। हालांकि अब शुद्धता और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से तैयार किए गए गाय के गोबर के उपलों की भस्म का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें आम, पीपल और पलाश की लकड़ियों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि में समर्पित किया जाता है।
ऑनलाइन हो रही है भस्म आरती की बुकिंग
अब श्रद्धालु भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं। पहले मंदिर काउंटर से टिकट मिलती थी, लेकिन अब एक दिन पहले सीमित शुल्क देकर ऑनलाइन टिकट बुक करने की सुविधा उपलब्ध है।