भोपाल में नवविवाहिता की मौत पर बवाल: एसआईटी ने शुरू की जांच, परिवार ने लगाया लीपापोती का आरोप

भोपाल में नवविवाहिता की मौत पर बवाल: एसआईटी ने शुरू की जांच, परिवार ने लगाया लीपापोती का आरोप

भोपाल/नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। भोपाल में 33 साल की ट्विशा शर्मा की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दहेज प्रताड़ना, प्रभावशाली परिवार के दबाव और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग तेज हो गई है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब स्थानीय अदालत ने उनके पति अधिवक्ता समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा शादी से पहले अभिनेता और मॉडल के रूप में काम कर चुकी थीं। बाद में वह दिल्ली की एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के करीब छह महीने बाद, 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उनकी मौत हो गई। इस मामले में समर्थ सिंह और उनकी मां, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी ने सोमवार को समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शादी के छह महीने के भीतर 'असामान्य परिस्थितियों' में मौत हुई है और आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान, एफआईआर और पेश किए गए व्हाट्सऐप चैट मुख्य रूप से समर्थ सिंह की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने माना कि जांच की स्थिति और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद से समर्थ सिंह फरार है। भोपाल पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वालों के लिए 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। उसके मोबाइल फोन बंद हैं और कई पुलिस टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। वहीं, गिरिबाला सिंह, भोपाल जिला अदालत की रिटायर्ड जज हैं और वर्तमान में भोपाल उपभोक्ता अदालत की प्रमुख हैं। उन्हें पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। आरोपी परिवार के प्रभावशाली होने की वजह से यह मामला काफी चर्चा में है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि परिवार के न्यायपालिका, पुलिस और मेडिकल प्रशासन में संबंध होने के कारण जांच प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और एफआईआर दर्ज कराने में भी उनके परिवार को परेशानी हुई। नवनिधि शर्मा ने अब मध्य प्रदेश के राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है।