‘साइलेंट किलर’ बन रहा हाई ब्लड प्रेशर, भूलकर भी न करें नजरअंदाज; हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ सकता है खतरा

‘साइलेंट किलर’ बन रहा हाई ब्लड प्रेशर, भूलकर भी न करें नजरअंदाज; हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ सकता है खतरा

नई दिल्ली, 22 मई। हाइपरटेंशन, जिसे हाई ब्लड प्रेशर के नाम से भी जाना जाता है, को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे अंगों को प्रभावित करती है और अनियंत्रित रहने पर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 70 वर्ष से कम उम्र वाले लोगों में समय से पूर्व मृत्यु का कारण हाइपरटेंशन बनता है। यह चिंताजनक है कि आजकल युवा वर्ग में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण तनाव, अनियमित खान-पान, व्यस्त जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अधिक नमक का सेवन है।

हाइपरटेंशन खतरनाक स्थिति है, क्योंकि जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ऊंचा रहता है, तो यह रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे दिल की कार्यक्षमता पर विपरीत असर पड़ता है, और यह अंततः दिल की मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। किडनी की कार्यक्षमता पर भी खतरा मंडराता है। समस्या यह है कि अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि उनका ब्लड प्रेशर उच्च है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर देर से प्रकट होते हैं। इसीलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की निगरानी करना बहुत आवश्यक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि हाइपरटेंशन का समय पर पता लगाने और उसे नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करनी चाहिए। लोगों को अपने घर पर ब्लड प्रेशर की जांच करना सीखना चाहिए और दिन में एक या दो बार इसकी माप लेनी चाहिए। हमेशा एक क्लिनिकली वैलिडेटेड ब्लड प्रेशर मॉनिटर का उपयोग करें, ताकि सटीक परिणाम मिले और उपचार सही तरीके से किया जा सके। यदि ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 एमएमएचजी या इससे अधिक रहता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉक्टर्स का मानना है कि नियमित जांच से बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है। हाइपरटेंशन से बचने के लिए स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, वजन का नियंत्रण, नमक का कम सेवन और तनाव प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हैं।