टी.सी. योहानन ने देश के लिए इंजेक्शन लेकर खेला, एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता

टी.सी. योहानन ने देश के लिए इंजेक्शन लेकर खेला, एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। प्रत्येक खेल में कुछ ऐसे खिलाड़ी होते हैं जिनके प्रदर्शन की सराहना की जाती है। ये खिलाड़ी अपने त्याग, बलिदान और उपलब्धियों के माध्यम से एक विरासत छोड़ जाते हैं। लंबी कूद में भारत के लिए ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं थडायुविला चंदापिल्लई योहानन (टी.सी. योहानन)। एशियाई खेलों में देश का मान बढ़ाने के लिए, योहानन ने अपने दर्द को नकारते हुए इंजेक्शन लेकर मैदान में कदम रखा।

टी.सी. योहानन का जन्म 19 मई 1947 को केरल के कोल्लम जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कूदने में गहरी रुचि थी। एक बार, जब वह नहर को पार नहीं कर पाए, तो उनके पिता ने उन्हें पार करने पर गिलास नींबू पानी का इनाम देने का वादा किया। इस प्रोत्साहन के बाद, योहानन ने सफलतापूर्वक नहर पार की और लंबी कूद में उनके करियर की शुरुआत यहीं से हुई। हालांकि, वह इसे पहले करियर के रूप में नहीं देखते थे, क्योंकि वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त थे और भिलाई जाकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। नौकरी के दौरान, बेंगलुरु में एक एथलेटिक्स इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने के बाद, वह चर्चा में आए और फिर लंबी कूद में करियर बनाने का निश्चय किया।

1974 योहानन के करियर का एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा। उन्होंने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। तेहरान में हुए इन खेलों में, उन्होंने 8.07 मीटर की दूरी तय करके एशियाई रिकॉर्ड बनाया, जो 30 वर्षों तक कायम रहा। एशियाई खेलों के दौरान, उनके पैर की अंगुली की हड्डी में चोट लग गई थी, और वह दर्द से परेशान थे, लेकिन उन्होंने इंजेक्शन लेकर खेलना जारी रखा। योहानन ने 1976 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन 1978 में चोट के कारण उन्हें इस खेल से बाहर होना पड़ा। उनके अद्वितीय प्रदर्शन और खेल में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।