कोलकाता, 21 मई। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने आर.जी. कर दुष्कर्म और हत्या केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) को नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया है। इस एसआईटी का संचालन एक संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने गुरुवार दोपहर पीड़िता के परिजनों की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय लिया। अदालत ने स्वीकार किया कि परिवार के द्वारा दोबारा जांच की मांग उचित है।
इस मामले की अगली सुनवाई 24 जून को आयोजित की जाएगी। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख पर जांच की प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
यह ध्यान देने योग्य है कि 9 अगस्त 2024 की सुबह कोलकाता के सरकारी आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सेमिनार हॉल में एक महिला जूनियर डॉक्टर का शव पाया गया था, जिनके साथ कथित तौर पर बलात्कार और हत्या की गई थी।
प्रारंभिक रूप से, मामले की जांच कोलकाता पुलिस की एसआईटी द्वारा की गई थी, जिसमें पूर्व सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया था।
बाद में, हाईकोर्ट के आदेश के तहत सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली, जिसमें संजय रॉय को बलात्कार और हत्या का मुख्य आरोपी माना गया।
हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी और आरोपी के लिए फांसी की सजा की मांग की थी।
पीड़िता के परिवार ने सीबीआई की जांच से असंतोष व्यक्त किया और हाईकोर्ट में नई जांच की मांग की, आरोप लगाते हुए कि सीबीआई ने मामले की जांच में लापरवाही बरती और केवल कोलकाता पुलिस की प्रारंभिक जांच को ही आगे बढ़ाया।
प्रारंभ में, इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की डिवीजन बेंच कर रही थी, लेकिन बाद में बेंच ने खुद को मामले से हटा लिया, जिसके फलस्वरूप यह केस न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष के समक्ष आ गया।
गुरुवार को नई बेंच के समक्ष इस मामले की दूसरी सुनवाई हुई, जिसके अंतर्गत अदालत ने सीबीआई को नए सिरे से जांच करने का आदेश जारी किया।