अमित शाह: वनवासी समाज पर यूसीसी की कोई भी पाबंदी लागू नहीं होगी

अमित शाह: वनवासी समाज पर यूसीसी की कोई भी पाबंदी लागू नहीं होगी

नई दिल्ली, 24 मई। 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में लाल किला मैदान में 'जनजाति संस्कृति समागम' का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का संगठक 'जनजातीय सुरक्षा मंच' और वनवासी कल्याण आश्रम था, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हुए। इस अवसर पर जनजातीय संस्कृति, परंपरा और अधिकारों से संबंधित कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पूरा देश भगवान बिरसा मुंडा की इस विशेष जयंती को उत्साह के साथ मना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी ने दुनिया में सबसे टिकाऊ और सस्टेनेबल जीवन शैली विकसित की है, तो वह भारत के जनजातीय समाज है। जनजातीय लोग अपने जीवन को प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने आगे बताया कि आदिवासी समुदाय प्रकृति की पूजा करता है, और यह प्रकृति की भक्ति सनातन परंपरा से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने यह अपील की कि लोग धर्म और संस्कृति को आपस में जोड़ने का प्रयास करें ताकि आने वाली पीढ़ियों को अपने मूल से जुड़ाव कायम रहे।

अमित शाह ने यह भी कहा कि संविधान के निर्माणकर्ताओं ने हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का समान अधिकार दिया है, और किसी पर भी दबाव डालकर उसका धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

उन्होंने बताया कि वनवासी समाज विभिन्न विश्वासों के साथ जीवन यापन करता है, लेकिन भारतीय संस्कृति हमेशा समावेशिता का संदेश देती है। उन्होंने भगवान राम और शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर यह सिद्ध किया कि हम सभी एक हैं। इसी प्रकार, निषाद राज द्वारा भगवान राम की सहायता करने पर राम ने उनके चरण धोकर वनवासी समुदाय का सम्मान किया।

गृह मंत्री ने कहा कि यह 'जनजातीय सांस्कृतिक समागम' भविष्य में जनजातीय समाज का महाकुंभ बना रहेगा। उन्होंने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा ने संचार सुविधाओं के अभाव में भी जनजातियों तक यह संदेश पहुंचाया कि यह देश हम सबका है, हमारा धर्म सही है और हमारे जंगलों पर किसी का अधिकार नहीं हो सकता।

यूसीसी के संदर्भ में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इसका कोई दायरा वनवासी समाज पर लागू नहीं होगा और जनजातीय समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया, जिसमें बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान जनजातीय कल्याण का बजट केवल 28 हजार करोड़ था, जबकि पीएम मोदी के नेतृत्व में इसे बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार करोड़ किया गया है।

उन्होंने पेसा कानून और पेसा सेल पर भी चर्चा की। पेसा सेल के माध्यम से आदिवासी समुदाय को उनकी अपनी भाषा में कानून के बारे में जानकारी दी जा रही है। मध्य प्रदेश के पेसा कानून को एक आदर्श उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्य इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

पेसा सेल पंचायती राज मंत्रालय के अंतर्गत एक विशेष प्रशासनिक इकाई है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त करना और पेसा अधिनियम 1996 को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

इस कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि इन संगठनों ने 'तू और मैं एक रक्त हैं' के संदेश के साथ समाज को जोड़ने और देश को मजबूत करने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम और जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित यह बड़ा समागम भारत की संस्कृति, भूमि और धर्म की रक्षा में आगे के समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।