अमित मालवीय: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती

अमित मालवीय: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती

नई दिल्ली, 22 मई। भारतीय जनता पार्टी केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भी मजबूती से प्रगति कर रही है। विरोधी दल इसे पहचान नहीं पा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि इस मुद्दे को "गंभीर आरोप" कहना इस बात का संकेत है कि विपक्ष आंकड़ों और तथ्यों से कितना दूर जा चुका है। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कही।

उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि वर्तमान भारत की तुलना 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' अवधि से करना ऐतिहासिक और सांख्यिकीय दृष्टि से गलत है। मालवीय ने बताया कि वर्ष 2012-13 में भारत की असली जीडीपी वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई थी, और महंगाई भी दोहरे अंकों में थी, जबकि देश नीति संबंधी समस्याओं और भ्रष्टाचार से जूझ रहा था।

मालवीय ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विश्व बैंक द्वारा भारत को सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा दिया गया है। ओईसीडी ने भारत की विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत 2026 और 2027 में भी चीन समेत अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेजी से बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट, ऊर्जा के झटकों और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी मजबूत है। ऐसे में इसे "अर्थव्यवस्था का पतन" कहना विश्व स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों का अवहेलना करना होगा।

मालवीय ने आगे कहा कि 2013 का संकट मुख्य रूप से बाहरी आर्थिक कमजोरी के कारण उत्पन्न हुआ था, जब चालू खाता घाटा जीडीपी के 4.8 प्रतिशत तक पहुँच गया था। जबकि अब, विश्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में भारत का चालू खाता घाटा केवल 1 प्रतिशत रहा। उन्होंने कहा कि यही कमजोरी और मजबूती के बीच एक बड़ा अंतर है।

महंगाई की चर्चा करते हुए, उन्होंने बताया कि 2012-13 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई लगभग 10 प्रतिशत थी, जबकि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच औसत महंगाई केवल 1.7 प्रतिशत रही, जो सीपीआई की शुरुआत के बाद से सबसे निचले स्तर पर है। अप्रैल 2026 में महंगाई दर 3.48 प्रतिशत रही।

मालवीय ने आगे कहा कि मार्च 2013 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 292 अरब डॉलर था, जबकि 8 मई 2026 तक यह बढ़कर करीब 697 अरब डॉलर हो गया है। आरबीआई के अनुसार, यह भंडार कम से कम 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

उन्होंने बताया कि मार्च 2013 में बैंकिंग क्षेत्र एक बड़ी समस्या था, लेकिन अब यह काफी मजबूत हो चुका है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2021 के 9.11 प्रतिशत से गिरकर मार्च 2025 में 2.58 प्रतिशत रह गया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 में गैर-खाद्य ऋण वृद्धि दर 15.9 प्रतिशत रही।

मालवीय ने कहा कि अप्रैल 2026 में जीएसटी संग्रह नीलाम होकर 2.42 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आर्थिक सर्वेक्षण में औद्योगिक क्षेत्र की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने बताया कि यह भारत में औपचारिक अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग विकास और टैक्स संग्रह में मजबूती का सूचक है।

उन्होंने कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता को पूरा कर लिया है, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ होगा। ओमान सीईपीए और यूएई बीआईटी जैसे समझौतें भी भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है।

मालवीय ने बताया कि सरकार की पीएलआई योजना के तहत 14 क्षेत्रों में 1.97 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अगस्त 2024 तक इस योजना के अंतर्गत 1.46 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 11.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जबकि फार्मा निर्यात 30.5 अरब डॉलर रहा।

उन्होंने कहा कि सरकार की नई रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (आरडीआई) योजना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्लाइमेट टेक और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा देगी। यह केवल अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक औद्योगिक नीति का हिस्सा है।

अमित मालवीय ने कहा कि आज भारत की विकास दर में मजबूती है, महंगाई नियंत्रण में है, विदेशी मुद्रा भंडार अपेक्षाकृत मजबूत है, बैंकिंग क्षेत्र बेहतर स्थिति में है और जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है। इसके बावजूद विपक्ष लगातार आर्थिक संकट का माहौल बनाने में लगा है।

उन्होंने कहा कि सचाई यह है कि भारत पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और यही तथ्य विपक्ष के दावों को गलत साबित करते हैं।