देहरादून, 19 मई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने 91 साल की उम्र में देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। खंडूरी के निधन के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया, जिसने राजनीति में ईमानदार, अनुशासन और सादगी की मिसाल कायम की। 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी ने अपनी शुरुआती शिक्षा के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय, कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग पुणे, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स दिल्ली और इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट सिकंदराबाद से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्हें छात्र जीवन में ही स्वतंत्रता आंदोलन ने प्रभावित किया। उन्होंने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स में 36 साल तक सेवा दी। इस दौरान उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाई, रेजीमेंट कमांडर रहे, सेना में चीफ इंजीनियर और आर्मी मुख्यालय में एडिशनल मिलिट्री सेक्रेटरी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 1982 में उन्हें 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' (एवीएसएम) से सम्मानित किया गया। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया। 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान वह भाजपा से जुड़े और फिर यहीं के होकर रह गए। वह 1991 में पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 1998, 1999, 2004 और 2014 में भी लोकसभा चुनाव जीता। संसद में रहते हुए उन्होंने भाजपा संसदीय दल के मुख्य सचेतक, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी, पब्लिक अकाउंट्स कमेटी, गृह मामलों की समिति, पब्लिक अंडरटेकिंग्स कमेटी और रक्षा संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2014 से 2018 तक वह रक्षा संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा, उन्होंने सड़क परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़ी संसदीय समितियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। वर्ष 2003 में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। उन्होंने सड़क अवसंरचना और राजमार्ग विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में भ...
अलविदा मेजर जनरल : यादों में भुवन चंद्र खंडूरी, ईमानदारी, अनुशासन और सादगी की रहे मिसाल