नई दिल्ली, 20 मई। भारतीय नौसेना का आईओएस सागर-26 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ, जिसमें समुद्र में सहयोग, प्रशिक्षण और साझेदारी का संदेश दिया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर तैनात आईएनएस सुनयना बुधवार को भारत लौट आया। इस जहाज का शानदार स्वागत फ्लैग-इन समारोह में किया गया, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री भूमिका, मित्र देशों के साथ बढ़ते संबंधों और साझा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
आईओएस सागर-26 मिशन 'वन ओशन, वन मिशन' के सिद्धांत पर आधारित था, जिसने समुद्र को व्यापार और रणनीति के साधन के बजाय मित्रता, विश्वास और सहयोग का मंच बनाया। इस अभियान के हिस्से के तौर पर 17 देशों के नौसैनिकों ने मिलकर काम किया, जिन्होंने एक साथ प्रशिक्षण लिया और समुद्र में संयुक्त गतिविधियों का संचालन किया। इस विशेष पहल में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस मिशन के दौरान, विविध भाषाएं, संस्कृतियां और सैन्य परंपराएं होते हुए भी सभी का एक ही उद्देश्य था: हिंद महासागर को सुरक्षित, स्थिर और सहयोगात्मक बनाना। भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि आईओएस सागर-26 केवल एक तैनाती नहीं थी, बल्कि एक सतत समुद्री सहयोग मंच के रूप में काम किया। जहाज पर मौजूद विदेशी नौसैनिकों ने भारतीय नौसेना की कार्यक्षमता, आधुनिक समुद्री तकनीकों और मानवता के दृष्टिकोण को देखा, जबकि भारतीय नौसैनिकों ने मित्र देशों के अनुभवों से सीखने का अवसर पाया।
समुद्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान, संचार समन्वय, समुद्री निगरानी, खोज-बचाव अभियान, आपदा राहत कार्य और समुद्री सुरक्षा से संबंधित प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी क्षेत्रीय चुनौती का सामना करने के लिए तेजी और प्रभावी रूप से कार्य करने की तैयारी भी थी। फ्लैग-इन समारोह में मिशन से जुड़े अधिकारियों और नाविकों को सम्मानित किया गया। भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आज हिंद महासागर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक संतुलन का प्रमुख केंद्र बन गया है, जिससे क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास और समन्वय की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
आईएनएस सुनयना की वापसी से इस मिशन ने भारत के 'महासागर' दृष्टिकोण को नई शक्ति प्रदान की है, जिसका लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा, विकास और समृद्धि को साझा करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईओएस सागर-26 जैसे अभियानों से भारत की नीति को साकार रूप मिलता है। यह न केवल सैन्य सहयोग में वृद्धि करता है, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास, क्षमता विकास और मानवीय सहयोग को भी मजबूत करता है।
मिशन के दौरान जहाज पर उपस्थित बहुराष्ट्रीय वातावरण ने यह संदेश दिया कि समुद्र सीमाओं से नहीं, बल्कि सहयोग से जोड़ा जाता है। इसलिए आईओएस सागर-26 को भारतीय नौसेना की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस मिशन की विशेषता रही कि इसकी शुरुआत हार्बर प्रशिक्षण से हुई और फिर समुद्री तैनाती, संयुक्त अभ्यासों और विभिन्न देशों के बंदरगाह दौरों तक, यह निरंतर सहयोग और साझेदारी का एक जीवंत उदाहरण बना रहा।
मिशन के दौरान भारत समेत 17 देशों के नौसैनिकों ने एकजुट होकर प्रशिक्षण लिया, समुद्र में कार्यान्वयन किया और एक-दूसरे की प्रक्रियाओं को समझा। भारतीय नौसेना के अनुसार, हार्बर प्रशिक्षण से लेकर समुद्री तैनाती और विभिन्न देशों के बंदरगाह विजिट तक, आईओएस सागर-26 ने क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को नई मजबूती प्रदान की है। इस मिशन ने समुद्री सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।