Kerala में मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान को मजबूत करने के लिए राज्यव्यापी स्तर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। इस पहल में दंत चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ और स्वास्थ्य संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। इसे राज्य में सामुदायिक स्तर पर मुंह के कैंसर की निगरानी के सबसे बड़े प्रयासों में से एक माना जा रहा है।
‘कैनवीन’ पहल के तहत चलाया जा रहा कार्यक्रम
अधिकारियों के मुताबिक यह अभियान ‘कैनवीन’ पहल के तहत चलाया जा रहा है। इसकी अगुवाई Indian Dental Association कर रहा है। वहीं VPS Lakeshore Hospital, चिट्टिलापिल्ली फाउंडेशन और अन्य स्वास्थ्य संस्थान इसमें सहयोग दे रहे हैं।
6,500 डेंटल क्लीनिक बनेंगे स्क्रीनिंग सेंटर
इस पहल का मुख्य केंद्र ‘मौखिक घाव निगरानी कार्यक्रम’ (OLSP) है। इसके तहत केरल के करीब 6,500 डेंटल क्लीनिकों को मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच और पहचान के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्क्रीनिंग, डॉक्यूमेंटेशन और रेफरल सिस्टम के जरिए संदिग्ध मामलों की पहचान की जाएगी।
‘देर से पता चलना बड़ी समस्या’
डॉ. ईपेन थॉमस ने कहा कि भारत में मुंह का कैंसर अब भी एक बड़ी जन-स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, क्योंकि ज्यादातर मरीज तब डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल शुरुआती स्तर पर जांच और सामुदायिक स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं मुंह के कैंसर के मामले
राष्ट्रीय कैंसर अनुमानों के अनुसार, भारत में दर्ज होने वाले कुल कैंसर मामलों में लगभग 30 प्रतिशत मामले मुंह के कैंसर के होते हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मामलों का पता बीमारी के गंभीर चरण में चलता है।
शुरुआती पहचान से बच सकती है जान
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बीमारी का पता शुरुआती दौर में चल जाए, तो इलाज के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं और मरीजों के बचने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।
डेंटिस्ट निभाएंगे अहम भूमिका
इस अभियान में डेंटल क्लीनिकों को सबसे आगे रखा गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग नियमित जांच और इलाज के लिए डेंटिस्ट के पास जाते हैं। इससे मुंह में होने वाले संदिग्ध घावों या लक्षणों की जल्द पहचान संभव हो सकेगी।
‘स्क्रीनिंग को नियमित डेंटल केयर का हिस्सा बनाना लक्ष्य’
डॉ. अश्विन मुल्लाथ ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य स्क्रीनिंग को नियमित डेंटल केयर का हिस्सा बनाना है, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले को तुरंत विशेषज्ञों के पास भेजा जा सके।
50 लाख रुपये की लागत से चलाया जाएगा प्रोजेक्ट
इस परियोजना पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे विभिन्न संस्थानों के सहयोग और दान के जरिए वित्तीय सहायता देकर पूरा किया जाएगा।
गरीब मरीजों को भी मिलेगी आर्थिक मदद
कार्यक्रम के तहत जुटाई गई राशि का इस्तेमाल आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज में सहायता देने के लिए भी किया जाएगा, ताकि जरूरतमंद मरीज समय पर इलाज प्राप्त कर सकें।