नई दिल्ली, 21 मई। देशभर में गर्मी का प्रकोप तेज हो चुका है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके साथ ही 25 मई से 2 जून तक नौतपा शुरू होने वाला है, जिससे धरती और भी गर्म होगी। इस दौरान भारत सरकार ने लोगों को सतर्क रहने और लापरवाही न बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को इस भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक का सबसे बड़ा खतरा होता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नवजात शिशु और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। गर्मी में इनकी देखभाल में लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस मौसम में छोटे बच्चों का शरीर जल्दी गर्म हो जाता है और वे कम पसीना निकालते हैं, जिससे उनका शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि उचित देखभाल और सावधानियां रखकर गर्मी के इस मौसम में बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है। लापरवाही बच्चे की सेहत को जोखिम में डाल सकती है। इसलिए गर्मी से संबंधित किसी भी परेशानी पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
एनएचएम ने बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाने के सुझाव भी दिए हैं। बच्चों को ठंडी और हवादार जगह पर रखें। उन्हें सीधे धूप या गर्म बंद कमरे में न छोड़ें। उनके शरीर का तापमान नियमित रूप से जांचते रहें और पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ देते रहें। मां का दूध भी समय-समय पर देना चाहिए।
बच्चों को हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाएं। ज्यादा कपड़े पहनाने से बचें। बच्चे को ठंडे पानी से नहलाने या गीले कपड़े से शरीर पोछने की सलाह भी दी गई है। यदि बच्चा रोता है, चिड़चिड़ा होता है, ज्यादा सोता है, उल्टी करता है, तेज बुखार रहता है या सांस लेने में परेशानी होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिशुओं में हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान करना कठिन होता है, इसलिए माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गर्मियों में बच्चों को दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर ले जाने से बचें।