भगवान Kartikeya को समर्पित स्कन्द षष्ठी का पर्व इस वर्ष 21 मई, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ रहा है और इस बार इसका महत्व कई शुभ योगों के कारण और भी बढ़ गया है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान स्कन्द की पूजा-अर्चना करते हैं।
तीन शुभ योगों का दुर्लभ संयोग
इस बार स्कन्द षष्ठी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और गुरु पुष्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन शुभ योगों में किए गए पूजा-पाठ, उपवास और दान का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
कब से शुरू होगी षष्ठी तिथि?
पंचमी तिथि गुरुवार सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ होगी। सूर्योदय सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 8 मिनट पर होगा।
पुष्य नक्षत्र से बनेगा गुरु पुष्य योग
गुरुवार को पुष्य नक्षत्र रहेगा, जो 22 मई की सुबह 2 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। पुष्य नक्षत्र के कारण गुरु पुष्य योग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
जानिए अन्य शुभ योग और करण
गण्ड योग सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। करण में बालव सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक और उसके बाद कौलव करण शाम 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:05 बजे से 4:46 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:45 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:35 बजे से 3:29 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:07 बजे से 7:28 बजे तक
- अमृत काल: रात 8:47 बजे से 10:18 बजे तक
राहुकाल में पूजा से बचने की सलाह
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा यमगण्ड सुबह 5:27 बजे से 7:10 बजे तक और गुलिक काल सुबह 8:53 बजे से 10:35 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि इन अशुभ मुहूर्तों में शुभ कार्य और पूजा-पाठ से बचें।
व्रत, मंत्र जाप और दान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कन्द षष्ठी के दिन व्रत रखने, स्कन्द मंत्र का जाप करने और ब्राह्मणों व जरूरतमंदों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व सुख, समृद्धि और साहस प्रदान करने वाला माना जाता है।