नई दिल्ली, 20 मई। भारत में एक महत्वपूर्ण बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ की शुरुआत की गई है। यह अभ्यास, जिसे भारतीय सेना द्वारा आयोजित किया जा रहा है, बुधवार को मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन पर शुरू हुआ। इस दो सप्ताह लंबे अभ्यास में भारत के अलावा 12 मित्र राष्ट्रों - भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम की सेनाएं शामिल होंगी। यह अभ्यास अर्ध-पहाड़ी और वन क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी ऑपरेशनों पर केंद्रित होगा। इस प्रशिक्षण में सामूहिक योजना निर्माण, सामरिक अभ्यास और समन्वित अभियानों पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि विभिन्न देशों के सैनिकों की अनुकूलन क्षमता, सहनशक्ति और सामरिक कौशल को और बेहतर बनाया जा सके। कठिन परिस्थितियों में कार्य करने के दौरान शारीरिक तंदुरुस्ती, अनुशासन और आपसी समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कार्यक्रम का शीर्षक ‘रिजॉल्यूट, रिलेंटलेस एंड यूनाइटेड’ है, और यह पहली बार आयोजित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न मित्र देशों के बीच सैन्य सहयोग, समन्वय और आपसी समझ को और अधिक मजबूत करना है। भारतीय सेना ने सभी विदेशी सैन्य दलों का पारंपरिक और सांस्कृतिक स्वागत किया। ‘प्रगति’ का मतलब है क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी, जो समानता, मित्रता और आपसी सम्मान के सिद्धांतों के तहत आयोजित किया जा रहा है।
यह अभ्यास विभिन्न सेनाओं के लिए एक मंच प्रस्तुत करेगा, जहां वे अपने पेशेवर अनुभव को साझा कर सकते हैं, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझ सकते हैं और सैन्य सहयोग को मजबूत कर सकते हैं। इस कार्यक्रम की शुरुआत में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक इन्फैंट्री मेजर जनरल सुनील श्योराण ने सभी दलों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक सहभागिता और सहयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे खुले मन, आपसी सम्मान और सीखने की भावना के साथ अभ्यास में भाग लें। उनका कहना था कि प्रत्येक देश का अनुभव और दृष्टिकोण इस अभ्यास के सामूहिक लक्ष्यों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण होगा। इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित करना और सहयोग के साझा क्षेत्रों की पहचान करना है। साथ ही, विभिन्न सेनाओं द्वारा विकसित सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
रक्षा संबंधों को मजबूत करना और खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करना भी इस अभ्यास का एक प्रमुख पहलू है। अभ्यास के दौरान, भारतीय तकनीक और रक्षा कंपनियां ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अंतर्गत स्वदेशी रक्षा उपकरणों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी। इससे न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रक्षा उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता में भारत की बढ़ती क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
भारतीय सेना का मानना है कि ‘प्रगति 2026’ क्षेत्रीय साझेदार देशों के बीच सैन्य सहयोग को अधिक मजबूती प्रदान करेगा, पेशेवर संबंधों को गहरा करेगा, और साझा सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।